“अकबर महान थे, तो महाराणा प्रताप क्यों नहीं ?” – केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह

स्रोत: न्यूज़ भारती हिंदी

राजस्थान के प्रतापगढ़ जिले में महाराणा प्रताप की प्रतिमा का अनावरण करते हुए केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने कहा, ‘इतिहासकार ‘अकबर द ग्रेट’ कहें, इस पर हमें कोई एतराज नहीं है लेकिन ‘प्रताप द ग्रेट’ क्यों नहीं?मेवाड़ के इलाके में उनका पराक्रम और बलिदान भी उतना ही प्रभावशाली है। इसलिए उन्हें ज्यादा सम्मान और महत्व दिया जाना चाहिए।’ उन्होंने कहा कि इतिहासकारों को इतिहास का पूनर्मूल्यांकन करना चाहिए ताकि मेवाड़ के शासक महाराणा प्रताप को अधिक तरजीह मिल सके।

महाराणा प्रताप की प्रशंसा करते हुए राजनाथ सिंह ने कहा, ‘मैं उन्हें निजी तौर पर महान मानता हूं।’ उन्होंने कहा, ‘इतिहास को सही संदर्भों में पेश किया जाना चाहिए। महाराणा प्रताप को आनेवाली पीढ़ियों के सामने एक महान व्यक्ति के तौर पर पेश किया जाना चाहिए।’ उन्होंने कहा कि मेवाड़ के महाराणा प्रताप की देशभक्ति और बलिदान को तवज्जो दी जानी चाहिए जिससे देश को प्रेरणा मिलेगी।

केन्द्रीय गृहमंत्री ने कहा कि महाराणा प्रताप की चर्चा होने पर तुरंत मेवाड़ की धरती का स्मरण आ जाता है। देश की स्वतंत्रता के लिए अपने प्राणों को न्यौछावर करनेवाले महाराणा प्रताप, पन्ना धाय, छत्रपति शिवाजी सहित विभिन्न महापुरुषों का स्मरण करते हुए उन्होंने कहा कि सभी महापुरुषों के पराक्रम, शौर्य, और वीरता को सदैव याद रखा जाएगा। उन्होंने कहा कि राजस्थान मीरा की भक्ति, पन्नाधाय की युक्ति और प्रताप की शक्ति की धरती है जिसने हिन्दुस्तान के गौरव को बढ़ाने का काम किया है। सिंह ने कहा कि महाराणा प्रताप की वीरता, शौर्य, देशभक्ति को काल और भूगोल की सीमाओं में नहीं बांधा जा सकता है।

महाराणा प्रताप की जीवनी को विस्तार में पढ़ाने के संबंध में राजस्थान सरकार के फैसले का स्वागत करते हुए राजनाथ सिंह ने कहा कि भारत सरकार भी महाराणा प्रताप की गाथा को केवल भारत में नहीं पूरे विश्व में पहुंचाने का प्रयास करेगी। उन्होंने कहा कि महाराणा प्रताप की 475वीं जयंती पूरे हिंदुस्तान में मनाई जाएगी और दुनिया के अन्य देशों में रहनेवाले भारतीय भी महाराणा प्रताप की जयंती मनाएंगे। साथ ही उन्होंने कहा कि वे मानव संसाधन मंत्री से महाराणा प्रताप की गाथा को सीबीएसई के पाठयक्रम में शामिल करने संबंध में आग्रह करेंगे।

राजनाथ सिंह ने कहा कि भारत के इतिहास में जिस प्रकार से महाराणा प्रताप का मूल्यांकन होना चाहिए था उतना सही मूल्यांकन नहीं हो पाया। महाराणा प्रताप देश में ही नहीं अपितु विदेश में भी प्रेरणा के स्रोत रहें है। वियतनाम द्वारा अमेरिका की सेना के खिलाफ संघर्ष और सफलता का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि वियतनाम को प्रेरणा महाराणा प्रताप के जीवन से मिली थी और यह बात खुद वियतनाम के राष्ट्रपति ने बताई थी। उन्होंने कहा कि वियतनाम के तत्कालीन विदेश मंत्री भी अपनी भारत यात्रा के दौरान उदयपुर में आकर महाराणा प्रताप को श्रद्धांजलि दी थी।

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