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आतंकी विचाधारा को समाप्त करने से ही आतंकवादी समाप्त होंगे – श्री अरूण कुमार

नई दिल्ली , 4 नवम्बर। हमारे देश में अध्ययन पहले की अपेक्षा कम हो गया है, जिसका असर राष्ट्र की नीति बनाने पर भी दिखता है। अपने देश के साथ-साथ अन्य देशों पर भी अध्ययन कम हुआ है। जिसके कारण कई तरह की समस्याएं सामने आ रही हैं। जबकि चीन हम पर और हमारे बाजारों पर गहराई से शोध करता है फिर रणनीति बनाता है जिसका परिणाम सबके सामने है, अगर हम दुश्मन की कमजोरी और ताकत को समझ जाएं तो उससे आसानी से निपटा जा सकता है। उपरोक्त बातें राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय सह सम्पर्क प्रमुख श्री अरुण कुमार ने भारतीय जन संचार संस्थान में कही। वह युवा विमर्श के तीन दिवसीय सम्मेलन के समापन के अवसर पर उपस्थित लोगों को संबोधित कर रहे थे।

उन्होंने कहा पाकिस्तान 1962 का युद्ध हारने के बाद से युद्ध करने की हिम्मत नहीं करता है। अब वह आतंकवाद का सहारा लेकर देश को तोड़ने की नाकाम कोशिश कर रहा है। पाकिस्तान की नीति स्पष्ट है, उसकी सेना भारत को छोटे-छोटे घाव देकर तोड़ना चाहती है। भारत के प्रति चीन की नीति भी साफ़ है, चीन पाकिस्तान को इस्तेमाल भारत के प्रति करते आया है। हमारे देश में पड़ोसी देशों को लेकर कभी भी स्थिति और नीति साफ़ नहीं रही है। नेपाल से ज्यादा नेपाली बोलने वाले भारत में रहते है इसके बावजूद हम नेपाल को लेकर भ्रम की स्थिति में रहे। अपने देश की सीमा बताते समय हम केवल भूमि की बारे में बताते है जबकि एक महत्त्वपूर्ण हिस्सा सागर का भूल जाते है। आज के समय में थल के अलावा जल का भी सामरिक महत्त्व है उसे हमें समझना होगा और वैसे ही नई रणनीति बनानी होगी। चीन ने अधिकतर देशों के साथ सीमा विवाद सुलझा लिया है केवल भारत के साथ ही उलझा रखा है। क्योंकि भारत का पहाड़ी इलाका जल का सबसे बड़ा स्त्रोत है।

श्री अरूण कुमार ने जोर देते हुए कहा कि आतंकवादियों का सफाया बेहद जरूरी लेकिन उससे भी जरूरी उनकी खतरनाक विचारधारा को समाप्त करने की आवश्यकता है। आतंकी विचारधारा का प्रसार करने वाले लोगों तक पहुंचना होगा तभी इस समस्या का अंत हो पाएगा। आइएसआई के लिए विश्वभर से लोग जुड़े है ये केवल बंदूक के बल पर नहीं हुआ बल्कि दिमाग पर एक तरह से कब्जा करने के कारण हुआ है। सोशल मीडिया और मीडिया के माध्यम से आसानी से आज पाकिस्तान भारत में अशांति फ़ैलाने का षड्यंत्र कर रहा है, सहारनपुर इसका उदाहरण रहा है। अगर हम अपने छोटे–छोटे मूल्यों को बनाए रखें और उन पर कायम रहें तो कोई ताकत हमें अपने पथ से अडिग नहीं सकती है। राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खुद भी जागरूक रहना होगा और समाज में जागरूकता के लिए अभियान चलाना होगा।

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