जम्मू-कश्मीर के अधिकांश लोग राष्ट्रवादी है, हमें यह समझने की जरूरत है – श्री अरुण कुमार

दिल्ली विश्वविद्यालय के खालसा कॉलेज में जम्मू-कश्मीर स्टडी सेंटर (JKSC)  का सेमिनार :

जम्मू-कश्मीर स्टडी सेंटर के निदेशक अरुण कुमार ने डीयू के गुरुतेग बहादुर खालसा कॉलेज में “जम्मू-कश्मीर के वर्तमान परिदृश्य” को जानने के लिए एक सेमिनार में संबोधन किया.
यह कार्यक्रम जम्मू-कश्मीर पीपल्स फोरम और नेशनल डेमोक्रेटिक टीचर्स फ्रंट द्वारा आयोजित किया गया था।

श्री अरुण कुमार के वक्तव्य के मुख्य बिंदु:

देशभर में कश्मीर को जिस तरह समस्या के रूप में प्रदर्शित किया जाता है, दरअसल यह समस्या नहीं है। इसको ठीक से समझने की जरूरत है। मीडिया को भी कश्मीर को लेकर एक सही दृश्य प्रस्तुत करने की जरूरत है।

देश में सही जानकारी के अभाव में लोगों को जम्मू कश्मीर के बारे में कई गलतफहमियां हैं। सही वस्तुस्थिति कानूनी दस्तावेजों के आधार पर देखकर प्रकट की जा सकती है।

कश्मीर के केवल पांच जिलों में अलगाववाद की बात है बाकी लोग भारत के साथ रहना चाहते हैं। जम्मू-कश्मीर के अधिकांश लोग राष्ट्रवादी है, हमें यह समझने की जरूरत है।

आज जो पाक अधिकृत कश्मीर कहा जाता है, वहां के लोग भी भारत के प्रति सहानुभूति रखते हैं। लेकिन भारत ने कभी उनसे संपर्क करने की कोशिश नहीं की। पाकिस्तान का न्यायालय भी एक मामले में निर्णय दे चुका है कि वह हिस्सा पाकिस्तान का नहीं है।

 गिलगित-बल्तिस्तान का इलाका हमारे देश के लिए महत्वपूर्ण है। क्योंकि यहां छह देशों की सीमाएं लगी हैं और वहां से कई देशों के लिए रास्ता सुगम है, लेकिन दुर्भाग्य से यह इलाका हमारा होते हुए भी हमारे पास नहीं है। हमें अगर फिर से सोने की चिड़िया बनना है तो हमें गिलगित चाहिए।

धारा 370 पर चर्चा की जरूरत। इस पर शिक्षा जगत के लोगों को काम करने की जरूरत है। जम्मू-कश्मीर को लेकर शोध की जरूरत है।

Arun-Kumar (1)

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