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नक्सली आदिवासियों के विकास में सबसे बड़ी रुकावट हैं – फारूख अली

नई दिल्ली. दिल्ली के कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में know your Urban Naxal, कार्यक्रम आयोजित किया गया. कार्यक्रम में नक्सलियों के शहरी नेटवर्क के बारे में बताया गया. कुछ दिन पहले महाराष्ट्र पुलिस ने 5 लोगों को गिरफ्तार किया था. अर्बन नक्सल, शब्द उस गिरफ्तारी के बाद चर्चा में आया था. कार्यक्रम में दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रोफेसर ए.के. भागी, प्रसिद्ध स्तम्भकार अभिनव प्रकाश, सुप्रीम कोर्ट की वकील सुमन लता और नक्सल पीड़ित पोडियाम पांडा और फारुख अली के साथ अन्य गणमान्य उपस्थित थे.

पोडियाम पांडा ने आत्मसमर्पण किया था और बहुत से चौंकाने वाले खुलासे किए थे. पांडा ने खुलासा किया था कि दिल्ली के कुछ प्रोफेसर और मानवाधिकार कार्यकर्ता नक्सलियों से लगातार संपर्क में रहते हैं. फारुख अली और उनके भाई पर नक्सलियों ने कई बार हमला किया, लेकिन वे लगातार नक्सलियों के विरोध में आवाज़ उठा रहे हैं. पोडियाम पांडा ने कॉन्स्टिट्यूशन क्लब के सभागार में अपना दुःख बताया कि मैं पहले अपने गांव का सरपंच था, लेकिन नक्सलियों ने मुझे डरा धमका कर अपने साथ जोड़ लिया. फारुख अली के भाई नक्सली विरोधी आंदोलन सलवा जुडूम से जुड़े थे, इसलिए

उन पर जानलेवा हमला हुआ था, वे छत्तीसगढ़ की घटनाओं के बारे में बताते हुए भावुक हो गए.

फारूख अली ने कहा कि जिस दिन नक्सलियों का शहरी कनेक्शन टूटने पर ही नक्सलियों का खात्मा हो पाएगा. करोड़ों की उगाही की बातों को भी फारूक अली ने उजागर किया. उन्होंने कहा कि नक्सली जो कहते है कि वे आदिवासियों के हक़ के लिए लड़ रहे हैं, वास्तव में ऐसा नहीं है. नक्सली आदिवासियों के विकास में सबसे बड़ी रुकावट हैं.

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