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नोबेल पुरस्कार सम्मानित डॉ. हरगोविंद खुराना / जन्म दिवस – 9 जनवरी

डॉ. हरगोविंद खुराना का जन्म अविभाजित भारतवर्ष के रायपुर (जिला मुल्तान, पंजाब) नामक कस्बे में हुआ था। प्रतिभावान् विद्यार्थी होने के कारण विद्यालय तथा कालेज में इन्हें छात्रवृत्तियाँ मिलीं। पंजाब विश्वविद्यालय से सन् 1943 में बी. एस-सी. (आनर्स) तथा सन् 1945 में एम. एस-सी. (ऑनर्स) परीक्षाओं में ये उत्तीर्ण हुए तथा भारत सरकार से छात्रवृत्ति पाकर इंग्लैंड गए।

यह बात सन 1946 की है.  डॉक्टर खुराना ने इंग्लैंड के लीवर पूल विश्वविद्यालय में डॉक्टर रॉबर्टसन की देखरेख में जीव विज्ञान पर तरह-तरह के शोध किए. सन 1948 में उन्हें उस विश्वविद्यालय से पीएच. डी. की डिग्री प्राप्त हुई. सन 1960 में उन्हें ‘प्रोफेसर इंस्टीट्युट ऑफ पब्लिक सर्विस’ कनाडा में स्वर्ण पदक से सम्मानित किया गया. कनाडा से खुराना को ‘मर्क एवार्ड’ भी प्राप्त हुआ था. उनकी ख्याति अमेरिका तक पहुंच गई थी. सन 1958 में उनके पास अमेरिका संस्था ‘रॉकफेलर’ का पत्र आया. इस संस्थान ने उन्हें अपने यहां एक अतिथि प्रोफेसर के रूप में बुलाया था. खुराना वहां गए और विज्ञान से संबधित अपने भाषण दिए. संस्था के निदेशक पर उनकी बातों का गहरा असर पड़ा. निदेशक ने उनके सामने नियमित रूप से संस्था में प्रोफेसर का काम करने के लिए अपना प्रस्ताव रखा. उनके निवेदन पर डॉ. खुराना उस संस्था से जुड़ गए. सन 1960 में उन्होंने कनाडा छोड़कर अमेरिका को अपना कार्यक्षेत्र बनाया.

सन 1968 में खुराना को ‘नोबेल पुरस्कार’ के लिए चुना गया. संपूर्ण भारतवर्ष खुराना की इस सफलता पर खुद को गौरवान्वित महसूस कर रहा था. खुराना नोबेल पुरस्कार पाने वाले भारतीय मूल के तीसरे भारतीय हैं. यह पुरस्कार तीन वैज्ञानिकों सम्मिलित रूप से प्रदान किया गया था. जिसमें खुराना के अलावा डॉ. राबर्ट होले और डॉ. मार्शल निरेनबर्ग शामिल थे. तीनों वैज्ञानिकों ने डी.एन.ए. अणु की संरचना को स्पष्ट किया था और यह भी बताया था कि डी.एन.ए. प्रोटीन्स का संश्लेषण किस प्रकार करता है. मनुष्य को लंबे समय तक स्वस्थ रखने की विधियों को खोजने में जिन्स सहयोगी हो सकता है. इन सभी दृष्टि से मानव जीवन में जिन्स का विशेष महत्त्व है.

सन 1964 में डॉक्टर खुराना ने अमेरिका की नागरिकता प्राप्त की थी. इसलिए सन 1968 में उन्होंने जब नोबेल पुरस्कार प्राप्त किया तो अमेरिका ने उन्हें ‘नेशनल एकेडमी ऑफ़ साइंस’ की सदस्यता प्रदान की यह सम्मान केवल विशिष्ट अमेरिका वैज्ञानिकों को ही दिया जाता है.

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