‘प्रेस्‍टीट्यूट’ पर वीके सिंह का जवाब- मेरा आशय मीडिया के कुछ पक्षपाती लोगों की तरफ था.

स्रोत: न्यूज़ भारती हिंदी

नई दिल्ली, अप्रैल 10 : यमन में जारी गृहयुद्ध से 5500 भारतीयों और करीब 1000 विदेशी नागरिकों को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए भारत सरकार द्वारा चलाए गए“ऑपरेशन राहत” को सफल बनाने में पूर्व सेना प्रमुख और वर्तमान विदेश राज्यमंत्री जनरल वीके सिंह की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। अपने ताजा इंटरव्यू में मीडिया को लेकर दिए गए ‘प्रेस्टीट्यूट्’ वाले बयान के सवाल के जवाब में जनरल वीके सिंह ने कहा कि मैंने मीडिया की तुलना वेश्यास से नहीं की है, वरन मेरा संकेत मीडिया के कुछ लोगों पर था जो अपना एजेंडा चलाते हैं।

उन्होंने कहा कि प्रेस्टीट्यूट शब्द का दूसरा कोई मतलब नहीं है। यह मेरे ऊपर लांछन लगाने की कोशिश की गई है। जी न्यूज़ को दिए अपने इस इंटरव्यू में जनरल वीके सिंह ने कहा कि मैं यह नहीं कहता कि मीडिया में सभी करप्ट लोग हैं। मेरा मानना है कि मीडिया में 90 प्रतिशत लोग अच्छे हैं, लेकिन 10 प्रतिशत लोगों का अपना एजेंडा है।

वीके सिंह ने कहा कि मीडिया के कुछ लोग पर्सनल एजेंडा चलाते हैं। कोई लॉबी इन विवादों के पीछे है। हथियार बेचनेवालों की लॉबी इनके पीछे हो सकती है। उन्होंबने कहा कि छोटी-छोटी चीजों को लेकर हैशटैग बनाना गलत है। विवादों की देश परवाह नहीं करता है। उन्होंने जो कहा वो मीडिया में सबके लिए नहीं था बल्कि उन्होंने अपनी टिप्पणी किसी खास के लिए की थी। मीडिया के कुछ खास लोग मुझे निशाना बना रहे हैं।

गौरतलब है कि बीते दिनों यमन से भारतीयों को निकालने के अभियान के बारे में पूछे जाने पर व्यंग्यात्मक लहजे में उन्होंने जिबूती में कहा था कि सच बताऊं तो यमन में (बाहर निकालने का) अभियान पाकिस्तानी दूतावास जाने से कम रोमांचक है। इसके बाद कांग्रेस सहित राजनीतिक दलों की ओर से उनकी टिप्पणियों पर कड़ी प्रतिक्रिया आने पर उन्होंने एक टीवी चैनल को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने इसके बाद एक ट्वीट में कहा, ‘दोस्तों आप ‘प्रेसटीट्यूट’ से क्या उम्मीद करते हैं? उन्होंने कहा कि पिछली बार टीवी एंकर ने सोचा कि स्पेलिंग में ‘ई’ की जगह ‘ओ’ है।

इस इंटरव्यू के अंत में वीके सिंह को देशवासियों से कुछ कहना चाहेंगे? तो जनरल सिंह ने कहा कि “देश सर्वोपरि है, इसके ऊपर कोई नहीं। कुछ ऐसा मत करिए कि कोई देश के ऊपर उंगली उठाए।”

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