Kerriappa

भारतीय सेना के प्रथम कमांडर- इन – चीफ, फील्ड मार्शल के.एम. करिअप्पा / पूण्य तिथी – 15 मई

फील्ड मार्शल कोडंडेरा मडप्पा करिअप्पा भारतीय सेना के प्रथम कमांडर-इन-चीफ थे। के.एम. करिअप्पा ने सन् 1947 के भारत-पाक युद्ध में पश्चिमी सीमा पर सेना का नेतृत्व किया था। वे भारतीय सेना के उन दो अधिकारियों में शामिल हैं जिन्हें फील्ड मार्शल की पदवी दी गयी। फील्ड मार्शल सैम मानेकशा दूसरे ऐसे अधिकारी थे जिन्हें फील्ड मार्शल का रैंक दिया गया था। उनका मिलिटरी करियर लगभग 3 दशक लम्बा था जिसके दौरान 15 जनवरी 1949 में उन्हें सेना प्रमुख नियुक्त किया गया। इसके बाद से ही 15 जनवरी ‘सेना दिवस’ के रूप में मनाया जाता है।

फील्ड मार्शल कोडंडेरा मडप्पा करिअप्पा का जन्म 28 जनवरी, 1899 में कर्नाटक के कोडागु (कुर्ग) में शनिवर्सांथि नामक स्थान पर हुआ था। पढ़ाई के साथ-साथ के.एम.करिअप्पा क्रिकेट, हॉकी और  टेनिस के अच्छे खिलाड़ी भी थे।  सन 1919 में वे KCIOs  (King’s Commissioned Indian Officers) के पहले दल में सम्मिलित किये गए जिन्हें इंदौर के डैली कॉलेज  में प्रशिक्षण दिया गया।

सन 1941-42 में उन्हें इराक,सीरिया और ईरान में तैनात किया गया और सन 1943-44 में उन्होंने अपनी सेवाएं बर्मा में दी। सन 1942 में किसी यूनिट का कमांड पाने वाले वे पहले भारतीय अधिकारी बने। सन 1944 में उन्हें टेम्पररी लेफ्टिनेंट कर्नल बना दिया गया। इसके पश्चात उन्होंने स्वेच्छा से 26वें डिविजन को अपनी सेवाएं दी जो बर्मा से जापानियों को निकालने में कार्यरत थी। यहाँ उन्हें ‘ऑफिसर ऑफ़ द आर्डर ऑफ़ द ब्रिटिश एम्पायर’ बनाया गया। जुलाई 1946 में उन्हें पूर्ण लेफ्टिनेंट कर्नल का पद दिया गया और उसी साल उन्हें फ्रंटियर ब्रिगेड ग्रुप का ब्रिगेडिएर बना दिया गया। सन 1947 में उन्हें ‘इम्पीरियल डिफेन्स कॉलेज’ यूनाइटेड किंगडम, में एक प्रशिक्षण कोर्स के लिए चुना गया। इस कोर्स के लिए चुने जाने वाले वे पहले भारतीय अधिकारी थे।

भारत के विभाजन के समय उन्हें सेना के बंटवारे की जिम्मेदारी सौंपी गयी जिसे उन्होंने पूरी निष्ठा, न्यायोचित और सौहार्दपूर्ण तरीके से पूरा किया। देश की आजादी के बाद करिअप्पा को मेजर जनरल रैंक के साथ ‘डिप्टी चीफ ऑफ़ द जनरल स्टाफ’ नियुक्त किया गया। जब उनकी पदोन्नति  लेफ्टिनेंट जनरल के तौर पर हुई तब उन्हें ईस्टर्न आर्मी का कमांडर बना दिया गया। सन 1947 में भारत-पाकिस्तान युद्ध के समय उन्हें पश्चिमी कमान का जी-ओ-सी-इन-सी बनाया गया। उनके नेतृत्व में ज़ो जिल्ला, द्रास और कारगिल पर पुनः कब्ज़ा किया गया। 15 जनवरी 1949 को के. एम. करिअप्पा को भारतीय सेना का प्रमुख चुना गया। इस प्रकार सेना का कमांडर इन चीफ बनने वाले वे पहले भारतीय हो गए।

सन 1953 में वे भारतीय सेना से सेवानिवृत्त हो गए और उन्हें ऑस्ट्रेलिया और न्यू ज़ीलैण्ड में भारत का उच्चायुक्त नियुक्त किया गया जहाँ उन्होंने 1956 तक अपनी सेवाएं दी। अमेरिका के राष्ट्रपति हैरी एस. ट्रूमैन ने उन्हें ‘आर्डर ऑफ़ द चीफ कमांडर ऑफ़ द लीजन ऑफ़ मेरिट’ से सम्मानित किया। देश को दी गयी उनकी सेवाओं के लिए भारत सरकार ने सन 1986 में उन्हें ‘फील्ड मार्शल’ का पद प्रदान किया। सेवानिवृत्ति के बाद के.एम.करिअप्पा कर्नाटक के कोडागु जिले के मदिकेरी में बस गए। वे प्रकृति प्रेमी थे और लोगों को पर्यावरण संरक्षण आदि के बारे में भी अवगत कराया। फील्ड मार्शल के.एम करिअप्पा का निधन 15 मई 1993 को कर्णाटक की राजधानी बैंगलोर में हो गया। मृत्यु के समय उनकी आयु 94 साल थी।

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