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भारत की स्वतंत्रता में सशस्त्र क्रांतिकरीओ की महत्त्वपूर्ण भूमिका रही है – डॉ. मोहन भागवतजी

10-04-2018 vskgujarat

कर्णावती महानगर, गुजरात में क्रांतिवीर सरदारसिंह राणा सेवा ट्रस्ट द्वारा “क्रांतिवीर सरदारसिंह राणा” के जीवन एवं कार्यो पर निर्मित वेबसाईट का लोकार्पण करते हुए पू. सरसंघचालक मा. श्री मोहन भागवतजी ने कहाँ कि आज पुण्य स्मरण का एक सुंदर अवसर प्राप्त हुआ है, हमारे देश की स्वतंत्रता के लिए जिन लोगो ने किसी न किसी रूप से प्रयत्न किया है उनका स्मरण कारण ही पुण्य स्मरण है. लेकिन हम उन्हें भूल से गए है.

स्वतंत्रता प्राप्ति के लिए जिसको जो ठीक लगा उस प्रकार से प्रयत्न किया कुछ लोगो ने राजनैतिक जागृति लाने का कार्य किया, कुछ ने देश में विद्यमान कुरीतियो को हटाने के लिए कार्य किया, अपने मूल की और वापस जाना चाहिए इस दिशा में भी प्रयत्न हुए तथा कुछ लोगो ने जो सशस्त्र प्रयास 1857 में किया गया था उसी प्रकार का प्रयास फिर से कर अंग्रेजो को भगा देना चाहिये. इस प्रकार 4 प्रकार से हमारे यहाँ काम हुआ लेकिन कुछ ऐसा हो गया कि जो जानकारी मिलती है वो बताती है कि एक ही रास्ता है. शास्त्राचार के माध्यम से स्वतंत्रता प्राप्त करने के लिए प्रयत्नशील लोगो की संख्या भी कम नहीं थी. अनेक क्रांतीकारियो ने अपने प्राणों का बलिदान दिया, अगणित कष्ट सहे. उन सभी क्रांतीकारियो के परिवार के माध्यम से उनकी स्मृति मिलती रहती है.

हमने स्वतंत्रता प्राप्त की लेकिन हमें विचार करना चाहिये कि हमने वास्तव में क्या प्राप्त किया. पहले यह कहाँ जाता था कि सारे दुखो का कारण अंग्रेज है उनके चले जाने से सब ठीक हो जायेगा. लेकिन अनुभव यह है कि मात्र अंग्रेजो के चले जाने से सब ठीक नहीं हो गया है. अपने देश को विश्व में सिरमोर बनाने के लिए हमें भारत की स्वतंत्रता के जिन लोगो ने बलिदान दिया है उनकी स्मृति मात्र से नहीं चलेगा. उनका जीवन चरित्र पढ़ना होगा, उसका चिंतन मनन करना होगा. इन सभी चारो धाराओ में काम करने वाले लोगो के जीवन प्रेरक है. उसमे भी क्रांतीकारियो के जीवन समर्पण की पराकाष्टा है, ऐसी ही क्रांतीकारियो की माला के एक प्रतिनिधि सरदार सिंह राणा है.

हमारे देश में भगतसिंह, चंद्रशेखर आज़ाद जैसे कई क्रांतिकारी हुए जिन्होंने अपना जीवन किसी एक उद्देश्य के लिए दे दिया. लेकिन विडंबना देखिये की आज ऐसे क्रांतीकारियो को दहशतगर्द कहने वाले लोग भी इस स्वतंत्र भारत में है.

देश, काल, परिस्थिति में समान स्वभाव के लोग भी अलग-अलग कृति करते है. इस वेब-साईट के माध्यम से क्रांतीकारियो को प्रेरणा देने वाले व्यक्तित्व कैसे थे यह जानकारी हमें मिलेगी. ये सभी लोग क्रांतीकारियो के चिंतन को आगे बढ़ाने वाले लोग थे.  ये सब लोग दुनिया की पहली पंक्ति के लोगो के साथ खड़े रहने के क्षमता रखने वाले लोग थे. लेकिन उन्होंने अपनी क्षमता का उपयोग व्यक्तिगत मान सम्मान के लिए न करके देश के लिए किया.

आज हमें उन लोगो ने उस समय की परिस्थिति के अनुसार जो किया वह सब करने की आवश्यकता नहीं है लेकिन आज हमें जो करना है उसके पीछे हमारा पूज्य भाव से समर्पण होना चाहिए. आज हमें गुण संपन्न बनना है दुनिया में कही भी गुणों से कोई समझोता नहीं होता, देश के हित में विचार कर उन्होंने हमें जो रास्ता दिखाया उस पर हमें चलना होगा. हमारे यहाँ राजनैतिक, आर्थिक, सामाजिक सभी में सुधार की आवश्यकता है.

सरदार सिंहजी ने केवल क्रांतीकारियो की सहायता की हो ऐसा नहीं है उन्होंने शिक्षा एवं समाज सुधार के क्षेत्र में भी सहायता की. देश के हित में कार्य करने वाले सभी की उन्होंने मदद की चाहे उनके विचार मेल खाते हो य नही. आज समय की मांग है कि मतभेद हो सकते है लेकिन देश के भले के लिए हमें एक दुसरे का विश्वास कर साथ चलना चाहिये. सरदारसिंह जी के जीवन में गीता के उपदेश के अनुसार युद्ध करना अनिवार्य था, कोई भी हथियार हाथ में लेकर अतिवादी बने बिना, लम्बे समय की लड़ाई उनके जीवन में देखने को मिलती है. उनके विषय में जानकारी प्राप्त करे. इस वेब-साईट के माध्यम से जो जीवन चरित्र प्रकाशित हुआ है वह खुब उपयोगी होगा ऐसी शुभकामना.

कार्यक्रम के अध्यक्ष महामहिम राज्यपाल श्री ओ.पी. कोहली ने प्रसंगोचित उद्बोधन करते हुए क्रांतिवीर सरदारसिंह राणा सेवा ट्रस्ट को वेब-साईट प्रारंभ करने के लिए अभिनंदन दिए. क्रांतिवीर सरदारसिंह राणा के प्रपोत्र श्री राजेंद्रसिंह राणा ने वेब साईट के विषय में महत्त्वपूर्ण जानकारी दी. गुजरात के उप मुख्यमंत्री श्री नितिनभाई पटेल, रा. स्व. संघ के पश्चिम क्षेत्र संघचालक डॉ. जयंतीभाई भाड़ेसिया, कर्णावती महानगर के महापौर श्री गौतमभाई शाह मंच पर उपस्थित रहे. इस अवसर पर बड़ी संख्या में गणमान्य लोग उपस्थित रहे.

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