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भारत में शिक्षा ज्ञानवर्धन के लिए रही है, केवल जीवनयापन के लिए नहीं – अनिरुद्ध देशपांडे जी

नई दिल्ली. नॉर्थ कैम्पस के कॉन्फ्रेंस सेंटर में युवा (यूथ यूनिटड़ फॉर विज़न एन्ड एक्शन) के तीन दिवसीय (02 से 04 नवंबर) वार्षिक समागम “विमर्श-2019” का शनिवार को शुभारंभ हुआ. आयोजन का उद्देश्य छात्रों को अकादमिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के माध्यम से राष्ट्र सेवा की ओर अग्रसर करना है.

कार्यक्रम के पहले दिन उद्घाटन सत्र “जागृत भारत” विषय पर चर्चा के साथ प्रारंभ हुआ. विमर्श – 2019 के संयोजक सौरभ ने ‘विमर्श’ की भूमिका रखी. उद्घाटन सत्र के अध्यक्ष डॉ. पायल मग्गो के साथ ही विषय पर चर्चा के लिए डॉ. अनिर्बान गांगुली (निदेशक, डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी रिसर्च फाउंडेशन) और नीरजा गुप्ता (प्राचार्य, आर्ट्स एंड कॉमर्स कॉलेज) का सान्निध्य छात्रों को प्राप्त हुआ.

अनिर्बान जी ने “जागृत भारत” के चहुंमुखी स्वरुप का विश्लेषण कर सांस्कृतिक, शैक्षणिक, ऐतिहासिक व अन्य आयामों को मद्देनजर रखते हुए विषय पर प्रकाश डाला और नीरजा जी ने महिला सशक्तिकरण के आत्मीय और मार्मिक अर्थों से रूबरू करवाया.

उद्घाटन सत्र के बाद अन्य समानांतर सत्रों का आयोजन हुआ. जहां “भारतीय स्वतंत्रता आन्दोलन” पर प्रोफेसर राघवेन्द्र तंवर, डॉ. अभिनव प्रकाश और डॉ. गीता भट्ट, “दाराशिकोह: एक सच्चे राष्ट्रवादी मुग़ल” विषय पर प्रोफेसर हीरामन तिवारी और प्रोफेसर डी.एन. दास, “राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर” पर डॉ. नंदिता सैकिया और प्रोफेसर मिलाप पुनिया और “Judicial Appointment” विषय पर नितीश राय परवानी और सिद्धांत सिजोरिया ने छात्रों को तथ्यों से अवगत कराया. इसके साथ ही छात्रों के प्रोत्साहन हेतु “Success Stories” और ओपन माइक का आयोजन भी किया गया.

अंतिम सत्र में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय संपर्क प्रमुख डॉ. अनिरुद्ध देशपांडे जी का सान्निध्य प्राप्त हुआ. जिन्होंने “भारतीय शिक्षा: भूत, वर्तमान और भविष्य” जैसे समसामयिक महत्वपूर्ण विषय पर छात्रों का ज्ञानवर्धन किया. उन्होंने कहा कि, “भारत में शिक्षा कभी भी केवल जीवनयापन मात्र के लिए नहीं, बल्कि ज्ञानवर्धन के लिए रही है. राष्ट्र की नियति शैक्षिक संस्थानों की कक्षाओं में बैठे लोगों के हाथों में है.” उन्होंने करियर की नई परिभाषा देते हुए कहा कि, “वर्तमान में careerism नवीनतम ‘ism’ है.”

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