6 August

मानव इतिहास का कलंक – हिरोशिमा पर परमाणु हमला / 6 अगस्त 1945

आज से ठीक 70 वर्ष पूर्व 6 अगस्त 1945 को अमेरिका ने जापान के शहर हिरोशिमा पर पहला परमाणु बम गिराया था. उस परमाणु हमले की विभीषिका आज भी रोंगटे खड़े कर देने वाली है ,ऐसा लगता है कि अब अगर परमाणु युद्ध हुए तो पूरी दुनियाँ ही तबाह हो सकती है ।  इसके तीन दिन बाद यानी 9 अगस्त को नागासाकी पर परमाणु बम गिराया गया।

इस बमबारी के बाद  हिरोशिमा में 1 लाख 40 हजार और नागासाकी में 74 हजार  लोग मारे गए थे। जापान परमाणु हमले की त्रसदी झेलने वाला दुनिया का अकेला देश है। यह परमाणु हमला मानवता के नाम पर सबसे बड़ा कलंक है । 6 अगस्त, 1945 की सुबह अमरीकी वायु सेना ने जापान के हिरोशिमा पर परमाणु बम लिटिल बॉय गिराया था। तीन दिनों बाद 9 अगस्त को अमरीका ने नागासाकी शहर पर फैट मैन परमाणु बम गिराया।

अमेरिका द्वारा किये गए परमाणु हमले के बाद अमरीका के राष्ट्रपति हैरी ट्रूमन ने कहा कि हिरोशिमा पर गिराया गया बम अब तक इस्तेमाल में लाए गए बम से दो हजार गुना शक्तिशाली है। इससे हुई क्षति का आज तक अनुमान नहीं लगाया जा सका है। बम को अमरीकी जहाज बी-29 से गिराया गया था जिसे इनोला गे के नाम से जाना जाता था। जहाज के चालक दल ने कहा कि धुंए का बड़ा सा गुबार और आग के जबरदस्त गोले ऊपर की तरफ उठे थे।

हिरोशिमा पर गिराए गए इस बम ने दूसरे विश्व युद्ध का नक्शा ही बदल दिया था। बम गिराए जाने से पहले जापान को बिना शर्त हथियार डालने को कहा गया था। ब्रितानी प्रधानमंत्री क्लिमेंट एटली ने कहा कि इस परमाणु प्रोजेक्ट में इतनी संभावनाए थीं कि ब्रिटेन ने अमरीकी वैज्ञानिकों के साथ मिलकर काम किया था। हिरोशिमा बम जिसे लिटिल बम का नाम दिया गया था के गिराए जाने के बाद 13 वर्ग किलोमीटर के दायरे में पूरी तरह उजड़ गया था ओर शहर में मौजूद 60 प्रतिशत भवन तबाह हो गए थे। शहर की साढ़े तीन लाख आबादी में से एक लाख चालीस हजार लोग मारे गए थे। बहुत सारे लोग बाद में विकिरण के कारण मौत का शिकार हुए। तीन दिनों के बाद अमरीका ने जापान के दूसरे शहर नागासाकी पर दूसरा परमाणु बम गिराया जिसमें 74 हजार लोग मारे गए थे। जापान ने 14 अगस्त, 1945 को हथियार डाल दिए थे।

इस परमाणु हमलें ने इंसानी बर्बरता के सारे रिकार्ड तोड़ दिए थे , बच्चों और औरतों की हजारों लाशें, शहरों की बर्बादी ने मानवता को शर्मशार कर दिया था । वास्तव में इस बर्बरता को कभी भी उचित नहीं ठहराया जा सकता है। यहाँ तक कि  किसी युद्ध में भी ऐसी बर्बरता को सही नहीं ठहराया जा सकता है।

 

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