मूल्य आधारित परंपरा के कारण दुनिया में है भारत का सम्मान – डॉ. मोहन भागवत जी

19.02.2018

वाराणसी (विसंकें). राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी ने कहा कि दुनिया में हमारी सनातन परंपरा अनादि काल से चली आ रही है. हमने दुनिया को ज्ञान विज्ञान आयुर्वेद सभ्यता संस्कृति एवं संस्कार दिये. इसी कारण आज दुनिया में भारत के प्रति आदर का भाव है. संघ समागम का मतलब भीड़ इक्ठ्ठा करना नहीं है. बल्कि एक ध्येय के लिए सभी का एकत्रित होना है. यह शक्ति प्रदर्शन नहीं, बल्कि एक लक्ष्य की प्रप्ति के लिये यह संगठन कार्य है. एकत्रीकरण संघ के लिए सामान्य बात है. गणवेश में एकत्रीकरण लम्बे अंतराल के बाद होता है. किन्तु छोटे एकत्रीकरण निरंतर होते हैं. सरसंघचालक जी काशी महानगर (उत्तरी एवं दक्षिणी) के सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय के विशाल मैदान में 18.02.2018,  रविवार को आयोजित संघ समागम में उपस्थित स्वयंसेवकों को संबोधित कर रहे थे.

डॉ. मोहन भागवत जी ने कहा कि हमारा लक्ष्य समाज को संगठित करना है. इसका मतलब यह नहीं कि हमें भीड़ इकठ्ठी करनी है. संघ का संगठन किसी मजबूरी में नहीं, वरन् कार्यकर्ताओं के त्याग व तपस्या के कारण हुआ है. हमें शक्ति प्रदर्शन का अहंकार नहीं, वरन् संगठन करना है. हमारा लक्ष्य ऐसा भारत बनाने के लिये है, जिससे सर्वत्र भारत की जय जयकार हो.

भारतीय समाज की चर्चा करते हुए सरसंघचालक जी ने कहा कि विविधता में एकात्मता हमारी सनातन परंपरा है. आज भी भारतीय समाज में यह परंपरा कायम है. आज भी हम परहित सरस धरम नहीं भाई में विश्वास करते हैं. स्वयंसेवक अपना कार्य करते हुए समाजकार्य के लिये समय दें तथा संघकार्य को प्रत्येक बस्ती और गांव तक पहुंचाने के लिये निरंतर कार्य करें. इस कार्य के लिए नित्य शाखा साधना आधार बने. दुनिया में जितने भी स्वयंसेवी संगठन हैं, उनमें से किसी का भी उतना विरोध नहीं हुआ जितना विरोध राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का हुआ. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ एवं स्वयंसेवकों के प्रति समाज की विश्वसनीयता निरंतर बढ़ी है. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ में कभी भी किसी के प्रति विरोध का भाव नहीं रखा. संघ के विषय में गलत धारणा और दुष्प्रचार करने वालों को भी संघ ने सम्मान दिया. जो लोग कुछ बिन्दुओं पर असहमति रखते हैं, उन्हें भी हमें जोड़ना है. इसी क्रम में कहा कि प्रत्येक मनुष्य का दायित्व निजी, पारिवारिक एवं सामाजिक होता है. स्वयंसेवक के जीवन में पारिवारिक एवं सामाजिक जीवन महत्वपूर्ण है. निजी जीवन तो राष्ट्र कार्य के लिये समर्पित होता है.

सरसंघचालक जी ने कहा कि सामूहिक पुरूषार्थ के बल पर भारत का भाग्योदय होगा. नेता नीत पार्टी और सरकारों से समाज का भला नहीं होने वाला है. इसीलिये जब तक समाज के प्रत्येक व्यक्ति की सोच में परिवर्तन नहीं होगा. तब तक भारत खड़ा नहीं होगा, भारत का भाग्य बदलने के लिए देश के लिये जीने मरने वाले लोग चाहिये. सभी को सामाजिक दायित्वों की पूर्ति के लिए समय निकालना चाहिए. हर दिन के 24 घंटों को बांट लें, मैं, मेरा कुटुंब, और मेरा समाज, तीनों की चिंता करें. सामूहिक शक्ति के बल पर ही भारत को परमवैभव पर लाना है.

समारोह में मंच पर क्षेत्र संघचालक वीरेन्द्र पराक्रमादित्य जी, विभाग संघचालक डॉ. जयप्रकाश लाल जी विराजमान थे. संघ समागम में क्षेत्र कार्यवाह राम कुमार वर्मा जी, क्षेत्र प्रचारक शिवनारायण जी, क्षेत्रीय कार्यकारिणी के सदस्य रामाशीष जी, क्षेत्र प्रचार प्रमुख राजेन्द्र सक्सेना जी सहित अन्य कार्यकर्ता उपस्थित थे.

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