वनवासी कल्याण आश्रम | VSKgujarat VSK Gujarat

वनवासी कल्याण आश्रम

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वनवासी कल्याण आश्रम भारत के वनो मे बसने वाले ८ करोड वनवासियों के सर्वांगीण विकास हेतु कार्य में

संलग्न संस्था है. भारत वनवासियों के विकास के लिये सूदूर जनजातीय गांवों के सामाजिक और आर्थिक

विकास के लिये तरह-तरह के कार्यक्रम चलाता रहता है. पूरे भारत में इसकी शाखाएँ हैं. विभिन्न राज्यों में यह

संगठन वनवासी कल्याण परिषद के रूप में भी कार्यरत है.

इसका ध्येयवाक्य है – “नगरवासी ग्रामवासी वनवासी – हम सभी हैं भारतवासी”

इतिहास :

वनवासी कल्याण आश्रम की स्थापना २६ दिसम्बर सन् १९५२ में मा. रमाकांत केशव देशपांडे ने की. भारतीय

वनवासी कल्याण आश्रम भारत के लगभग सभी राज्यों में कार्यरत है | लगभग २४० जनजातियों,२४७ वनवासी

जिलों तथा ९५९५ गांवों में १२,९३८ प्रकल्पों के माध्यम से वनवासी कल्याण आश्रम का सम्पर्क और कार्य है.

उद्देश्य :

१.वनवासी समाज में अपनी आस्थाओं,परम्पराओं और मान्यताओं के प्रति विश्वास को दृढ करना.

२.वनवासी समाज में अपनी पहचान की रक्षा , स्वाभिमान और आत्म – गौरव का भाव दृढ करना.

३.वनवासी समाज को शिक्षा, संस्कार तथा स्वावलंबन से अपना अवम अपने समाज का सर्वांगीण विकास प्रेरित

करना.

४.वनवासी समाज को अपने समाज में सफल एवं सुदृढ नेतृत्व तथा स्वनिर्णय से राष्ट्रहित में लग जाने के

लिए प्रेरित करना.

५.वनवासी और शहरवासी के बीच सामंजस्य एकत्व और स्नेहिल बंधुत्व भाव निर्माण करना.

६.वनवासी समाज में सेवा के छदम आवरण के पीछे चल रही अराष्ट्रीय गतिविधियों से सजगता पैदा करना.

प्रमुख कार्य :

1  आर्थिक विकास

2  शिक्षा

3  स्वास्थ्य

4  संस्कार

5  संस्कृति रक्षा

6  वनवासी खेल

सेवाएँ :

१. शिक्षा प्रकल्पों के माध्यम से वनवासी क्षेत्र में शिक्षा और ज्ञान का प्रसार करना.

२.चिकित्सा प्रकल्पों के माध्यम से स्वस्थ एवं निरोगी वनवासी समाज निर्माण करना.

३.वनक्षेत्र की युवा शक्ति को खेल प्रकल्पों के माध्यम से संगठित कर समाजोत्थान एवं राष्ट्रोत्थान की दिशा

देना.

४.संस्कार केन्द्रों के माध्यम से वनवासी बालकों में श्रेष्ठ संस्कारों का सिंचन करना.

५.नयी तकनीकी चेतना के माध्यम से आर्थिक उन्नयन की दिशा में ग्राम विकास को बढ़ावा देना |

६.श्रद्धा जागरण केन्द्रों,उत्सव के आयोजनों ,भजन मंडलियों के माध्यम से स्वधर्म और संस्कृति के प्रति प्रज्ञा

निर्माण करना.

७.जागरण पत्रिकाओं के माध्यम से परिषद के कार्यों की जानकारी एवं ज्ञान प्रसारण करना.