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ब्रिटिश सेना के विरुद्ध वेलूर विद्रोह / 10 जुलाई, 1806

भारतीय इतिहास में सन 1857 को देश के पहले स्वाधीनता संग्राम के रूप में याद किया जाता है हालांकि इससे पहले भी कई छोटे युद्ध हो चुके थे। इस क्रम में सबसे पहली पहल सन 1806 में आज ही के दिन 10 जुलाई को की गई थी। वेल्लोर म्यूटिनी के नाम से मशहूर इस पहली जंग में भारतीय सिपाहियों ने ईस्ट इंडिया कंपनी के खिलाफ जंग छेड़ दी थी।

हालांकि यह जंग 1857 की ही तरह धार्मिक कारणों के आधार पर शुरू की गई थी। इस जंग को भारतीय इतिहास में आजादी की पहली कोशिश के रूप में याद किया जाता है। नवंबर 1805 में ब्रिटिश कंपनी ने सेना के ड्रेस कोड में परिवर्तन कर दिया था जिसके अनुसार हिन्दू अपने ललाट पर तिलक नहीं लगा सकते थे और मुसलमानों के लिए अपनी दाढ़ी हटाना अनिवार्य कर दिया गया।

इन नियमों के खिलाफ खड़े होकर वेल्लोर में मद्रास आर्मी विंग के एक हिन्दू तथा एक मुस्लिम सिपाही ने जंग छेड़ दी जिसे बाद में अन्य सधर्मी साथियों का साथ मिला। विद्रोह शुरू होने के कुछ ही देर में विद्रोही सिपाहियों ने शहर में मौजूद सभी ब्रिटिश सैनिकों तथा अधिकारियों में मार-काट मचा दी। इसी बीच एक ब्रिटिश सैनिक भाग कर निकटवर्ती ब्रिटिश सेना की टुकड़ी के पास आरकोट जा पहुंचा। जहां से तुरंत सर रोलो गिलेस्पी की अगुवाई में सेना रवाना हो गई और विद्रोह पर काबू पा लिया गया।

विद्रोह समाप्त होने के बाद लगभग सभी विद्रोही सिपाहियों को या तो फांसी की सजा दी गई या गोली मार दी गई। कुछ ही घंटे चली इस जंग में विद्रोह सिर्फ वेल्लोर शहर तक ही सीमित रहा परन्तु इस विद्रोह ने अंग्रेजी शासन को अपनी नीतियों पर एक बार फिर सोचने के लिए मजबूर कर दिया था।

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