संस्कृति दुनिया में केवल भारत के पास, शेष देशों में केवल सभ्यताएं – डॉ प्रणव पण्ड्या

भोपाल (विसंकें). अखिल विश्व गायत्री परिवार के निदेशक एवं देव संस्कृति विश्वविद्यालय, हरिद्वार के कुलपति डॉ प्रणव पण्ड्या ने कहा कि संस्कृति भारत के अलावा अन्य कहीं नहीं है. दुनिया के सभी देशों में सभ्यताएं हैं. भारतीय संस्कृति से ही जीवन मूल्य पनप सकते हैं. भारत को अपनी संस्कृति पर गर्व है. सद्गुणों की खेती ही संस्कृति है. संस्कृति का सम्बन्ध आध्यात्मिकता से है. हम कैसे अपना जीवन मूल्यवान बना सकते हैं, इस पर ध्यान देना चाहिए. मध्यप्रदेश विधानसभा में ‘‘मूल्य आधारित जीवन’’ विषयक तीन दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय परिसंवाद के समापन सत्र में संबोधित कर रहे थे. समापन सत्र की अध्यक्षता मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने की.

डॉ प्रणव पण्ड्या ने कहा कि आज टेक्नालॉजी के अत्यधिक उपयोग के कारण मनुष्य मशीन बन गया है. सूचना प्रौद्योगिकी के दुरूपयोग ने मानवीय मूल्यों में भयंकर गिरावट पैदा की है. परिवारों के टूटने का बड़ा कारण मूल्यों का टूटना है. आज सारा समाज आस्था के संकट से ग्रसित है. आज संस्कृति का आशय नाचने-गाने, शोर-शराबेपूर्ण संगीत से माना जाता है, जबकि संस्कृति का सम्बन्ध मानव जीवन में आध्यात्मिकता से है. भगवान आदर्शों का समूह है अतः भगवान को तत्व से जानना ही मानव की सबसे बड़ी उपलब्धि है. मूल्यों के बिना यह जीवन नहीं चल सकता. डॉ पण्ड्या ने कहा कि मुझे लगता है कि हरिद्वार स्थित शांतिकुंज का एक कार्यकर्ता आज मुख्यमंत्री के रूप में कार्य कर रहा है. यदि देश में सात ऐसे मुख्यमंत्री और आ जाएं तो यह देश पुनः सोने की चिडि़या बन सकता है. शिक्षा पर विचार व्यक्त करते डॉ पण्ड्या ने कहा कि शिक्षा आत्मीयता एवं प्रेम से भरी होनी चाहिए. उन्होंने जीवन की सफलता के चार सूत्र- एक्सेस, एक्सप्लेन, एक्सप्लोर और एक्सीलेंट बताए. सामाजिक सफलता के चार सूत्र- समझदारी, ईमानदारी, जिम्मेदारी और बहादुरी पर कहा कि सूचना प्रौद्योगिकी का गलत उपयोग, गलत रोल मॉडल का चयन, नेट का अधिक उपयोग, परिवार संस्था का टूटना, ऐसे कारण हैं, जिससे सामाजिक मूल्यों में गिरावट आ रही है.

अध्यक्षीय उद्बोधन में मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि सनातन परम्पराओं के निर्माण का कार्य समाज के साथ मिलकर करने का संकल्प मध्यप्रदेश सरकार ने किया है. इसीलिए सिंहस्थ के पारम्परिक अनुष्ठान के साथ-साथ एक वैचारिक अनुष्ठान की दृष्टि से यह अंतरराष्ट्रीय संविमर्श आयोजित किया गया है. विद्वानों की सभाओं से निकले निष्कर्षों के माध्यम से हम दुनिया को यह बताएंगे कि किस तरह जीवन मूल्यों पर चलकर व्यक्ति, समाज एवं राष्ट्र का विकास किया जा सकता है. आज व्यक्ति के साथ-साथ दुनिया को भी बदलने की आवश्यकता है.

इस अवसर पर शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास के राष्ट्रीय सचिव अतुल कोठारी ने कहा कि मूल्यों को आम जीवन में उतारने की जिम्मेदारी समाज की है. शासन नियम बना सकता है, परंतु उसे लागू करने एवं अमल में लाने की जिम्मेदारी समाज को निभानी होगी. शिक्षाविद् अनिरूद्ध देशपाण्डे ने कहा कि सनातन परम्पराओं के पुनर्निमाण के लिए किया गया  वैचारिक अनुष्ठान एक प्रशंसनीय प्रकल्प है. संविमर्श में विचारणीय सभी बिन्दू समाज से लिए गए हैं, अतः इन्हें अमल में लाया जाना चाहिए. मध्यप्रदेश के विधानसभा अध्यक्ष सीताशरण शर्मा ने कहा कि मूल्य आधारित जीवन पर विमर्श समाज में मूल्यों की स्थापना के लिए आग्रह है. हमें ऐसे समाज का निर्माण करना है कि लोग बिना किसी आग्रह के मूल्यों को धारण करें.

माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो बृज किशोर कुठियाला ने संविमर्श के घोषणा-पत्र का वाचन किया. घोषणा-पत्र में बताए मुख्य बिन्दुओं के अंतर्गत- चिकित्सकों को सामाजिक सेवा शिविर के माध्यम से दस दिनों तक गांवों में कार्य करना, विद्यार्थियों, अधिकारियों, कर्मचारियों द्वारा सप्ताह में एक दिन अपने परिसर की साफ-सफाई, योग को पाठ्यक्रम का अनिवार्य हिस्सा बनाना, उच्च शिक्षा में भारतीय दर्शन को शामिल करना, निर्धन विद्यार्थियों के लिए सुपर-30 जैसे संस्थान प्रारम्भ करना, योग्य एवं कुशल शिक्षकों का डेटाबेस बनाना, एथिकल फोर्स फॉर गुड गवर्नेंस का गठन करना, एथिकल दबाव को बढ़ावा देना तथा मीडिया एवं आईटी के माध्यम से मूल्यों का प्रसार करना जैसे विचार प्रस्तुत किए गए.

मूल्य आधारित जीवन विषयक आलेख प्रतियोगिता के पुरस्कृत प्रतिभागियों, भूमिका कपूर, स्वप्न प्रधान, रवि कुमार अग्रहरी, कोमल प्रसाद, रवीन्द्र कुमार, शुभेन्दु सत्यदेव, नीता चावड़ा, अपूर्वा शर्मा को पुरस्कृत किया गया. समापन सत्र से पूर्व विगत आज प्रातः समानांतर सत्रों में विभिन्न विषयों में हुए विमर्ष का प्रतिवेदन प्रस्तुत किया गया.

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