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स्वयंसेवक देशभर में डेढ़ लाख से अधिक सेवा प्रकल्प चला रहे हैं – भय्याजी जोशी

भुवनेश्वर, 18 अक्तूबर। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के स्वयंसेवक देशभर में 1.50 लाख से अधिक सेवा कार्य चला रहे हैं। 20 स्थानों पर सेवार्थ बड़े अस्पताल एवं 15 ब्लड बैंक भी चलाते हैं।

भुवनेश्वर में चल रही संघ की अखिल भारतीय कार्यकारी मंडल की बैठक के अंतिम दिन आयोजित पत्रकार सम्मेलन में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरकार्यवाह भय्याजी जोशी ने कहा कि आपदा के समय तो संघ पहले से ही काम कर रहा था, परंतु 1989 से संघ ने योजनाबद्ध रूप से सेवा क्षेत्र में कार्य करना शुरू किया। वर्तमान में स्वयंसेवकों द्वारा डेढ़ लाख से अधिक सेवा प्रकल्प चलाए जा रहे हैं ।

उन्होंने कहा कि 20 स्थानों पर संघ के स्वयंसेवक सेवार्थ बड़े अस्पताल चलाते हैं, उनकी क्षमता 50 से 150 बेड तक है. 15 ब्लड बैंक संघ के स्वयंसेवक चलाते हैं, जो उस क्षेत्र की 50 प्रतिशत तक की आवश्यकता को पूरा करते हैं। उन्होंने कहा कि दिव्यांगों के क्षेत्र में भी स्वयंसेवक कार्य कर रहे हैं। नेत्रदान के क्षेत्र में स्वयंसेवकों के प्रयास से 3 से 4 हजार नेत्रदान प्रतिवर्ष होते हैं।

ग्राम विकास के क्षेत्र में भी संघ के स्वयंसेवक कार्य कर रहे हैं । इन प्रयासों से अभी तक देश के 250 गांवों में ग्रामवासियों के सहयोग से ही विकास का मॉडल स्थापित किया है।

उन्होंने कहा कि हमारी ग्राम विकास की परिकल्पना में हम मानते हैं कि गांव के लोग ही अपना कार्य करें। हम केवल सहयोग करेंगे। संघ के स्वयंसेवकों ने पांच क्षेत्रों जैसे शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, सामाजिक वातावरण, स्वावलंबन को ग्राम विकास में शामिल किया है।

उन्होंने कहा कि पूरे देश में एक लाख से अधिक गांव ऐसे हैं, जहां संघ के विचारों को स्वीकार करने वाले, समझने वाले व सहयोग करने वाले लोग हैं।

प्रतिदिन शाखा में आने वाले 16 -17 साल की आयु से ऊपर के लोगों के शामिल होने वाले स्वयंसेवकों की संख्या लगभग 5 लाख है तथा 17 वर्ष से कम आयु के भी चार लाख दैनिक आते हैं। उन्होंने कहा कि देश में लगभग 59 हजार ग्रामीण मंडलों में से लगभग 30 हजार मंडलों में संघ का काम है।

पत्रकारों द्वारा एनआरसी के मामले में पूछे गये सवालों के उत्तर में भय्याजी जोशी ने कहा कि एनआरसी पूरे देश में लागू होना चाहिए। उन्होंने कहा कि किसी भी सरकार का कार्य है कि देश में घुसपैठियों की पहचान करे और नीति बना कर उसके आधार पर उचित कार्रवाई करे। अभी तक यह प्रयोग केवल असम में हुआ है। इसे पूरे देश में लागू करना चाहिए।

अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण को लेकर पूछे गये सवाल के उत्तर में उन्होंने कहा कि हमारा यह मानना रहा है कि अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि पर मंदिर निर्माण को लेकर सभी बाधाओं को समाप्त किया जाना चाहिए। अब जब इस मामले को लेकर न्यायालय में सुनवाई पूरी हो चुकी है और हम आशा करते हैं कि निर्णय हिन्दुओं के पक्ष में आएगा।

न्यायालय से बाहर इस मामले को सुलझाने के संबंध में किये जा रहे प्रयासों के संबंध में पूछे गये सवाल के उत्तर में उन्होंने कहा कि इस मामले को सद्भावना से समाधान निकालने के लिए प्रयास किये गए। अगर ऐसा होता तो भारत की प्रतिष्ठा विश्व में बढ़ी होती। हम ने भी इन प्रयासों का स्वागत किया था। लेकिन ऐसा नहीं हो पाया और न्यायालय में मामला लंबा समय तक चला। अब न्यायालयीन कार्रवाई पूरी हो गई है, अब सबको निर्णय की प्रतीक्षा करनी चाहिए।

समान आचार संहिता लागू करने के संबध में पूछे गये एक प्रश्न के उत्तर में कहा कि यह मांग काफी पुरानी है। संविधान निर्माण के समय ही इसका फैसला हो जाना चाहिए था। यह सभी के हित में है और किसी भी देश में उसके नागरिकों के लिए एक समान कानून होना चाहिए।

कश्मीरी पंडितों की वापसी के संबंध में उन्होंने कहा कि सुरक्षा कारणों से कश्मीरी पंडितों को अपने घरों से पलायन करना पड़ा था। हम चाहते हैं कि कश्मीर में सुरक्षा का पुन: वातावरण बने ताकि कश्मीरी हिन्दू समाज की उनके अपने घरों में वापसी हो सके।

अखंड भारत के संबंध में पत्रकारों द्वारा पूछे गये सवाल का उत्तर देते हुए उन्होंने कहा अंखड भारत की कल्पना उनका सपना है। विभाजित भारत के समस्त इलाकों की सांस्कृतिक धारा एक ही है।

बंगाल में निरंतर हो रही हिंसा पर उन्होंने कहा कि किसी भी सरकार का दायित्व है कि उसके नागरिकों की समुचित सुरक्षा सुनिश्चित करे। यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि वामपंथी शासनकाल में विरोधी विचारधारा के प्रति प्रारम्भ हिंसा का चक्र वर्तमान सरकार के बाद भी अबाध गति से चल रहा है।

इस पत्रकार वार्ता में संघ के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख अरुण कुमार व सह प्रचार प्रमुख नरेन्द्र ठाकुर उपस्थित थे।

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