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आंखों से बोलते थे अटल जी – प्रवीण गुगनानी

आंखों से बोलते थे अटल जी प्रसिद्ध दार्शनिक सुकरात ने कहा था कि “जिस देश का राजा कवि होगा उस देश में कोई दुखी न होगा” – अटल जी के प्रधानमंत्रित्व काल में यह बात चरितार्थ हो रही थी. स्वातंत्र्योत्तर भारत के नेताओं में कुछ ही ऐसे नेता हुए हैं जो विपक्षियों से भी सम्मान पातें हों. […]

16 August 2018
 
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सैफ़ुद्दीन सोज़ की किताब के बहाने , कश्मीर समस्या की जड़ की खोज– डा० कुलदीप चन्द अग्निहोत्री

जून के अंतिम दिनों में सोनिया कांग्रेस के एक बड़े नेता सैफ़ुद्दीन सोज़ की जम्मू कश्मीर को लेकर लिखी गई एक नई किताब Kashmir- Glimpses of History and the story of struggle  की चर्चा अख़बारों और टैलीविजन में शुरु हो गई थी । चर्चा को हवा देने के लिए सोज़ ने एक बयान जारी कर […]

10 August 2018
 
Mahatama-Gandhi-in-Srinagar-with-Begum-Akbar-Jehan-and-her-daughter-Khalida-Shah

वे पन्द्रह दिन… / 01 अगस्त, 1947 – प्रशांत पोळ

शुक्रवार, 01 अगस्त 1947. यह दिन अचानक ही महत्त्वपूर्ण बन गया. इस दिन कश्मीर के सम्बन्ध में दो प्रमुख घटनाएं घटीं, जो आगे चलकर बहुत महत्त्वपूर्ण सिद्ध होने वाली थीं. इन दोनों घटनाओं का आपस में वैसे तो कोई सम्बन्ध नहीं था, परन्तु आगे होने वाले रामायण-महाभारत में इनका स्थान आवश्यक होने वाला था. स्वतंत्रता […]

1 August 2018
 
Daya Sagar

महबूबा मुफ़्ती जी के सेल्फ रूल और कश्मीर घाटी की स्थिति पर विधान सभा में दिए गए वक्तव्य पर मोदी सरकार को स्थिति साफ़ करनी ही होगी – दया सागर

“एक बक्त  होता था जब कहीं  encounter   होता  था   तो  चार- चार  पाँच- पाँच गाँव लोग छोड़ कर चले जाते थे आज एनकाउंटर होता है चार –चार  पाँच- पाँच गांब से लोग आ के  पत्थर मारते  हैं!” महबूबा मुफ़्ती यहाँ एक ओर  भारत सरकार और दूसरे नेता यह कहते हैं कि कश्मीर घाटी ( जम्मू […]

19 February 2018
 
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स्वामी विवेकानंद: भारतीय संस्कृति के वैश्विक उद्घोषक

स्वामी विवेकानंद जी ने भारत को व भारतत्व को कितना आत्मसात कर लिया था यह कविवर रविन्द्रनाथ टैगोर के इस कथन से समझा जा सकता है जिसमें उन्होनें कहा था कि – “यदि आप भारत को समझना चाहते हैं तो स्वामी विवेकानंद को संपूर्णतः पढ़ लीजिये”. नोबेल से सम्मानित फ्रांसीसी लेखक रोमां रोलां ने स्वामी जी के […]

12 January 2018
 
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अयोध्या: तथ्य, तारीखें, हाशिम अली का बयान और मुस्लिमों का रूख

अयोध्या के राम जन्म भूमि स्थल पर भव्य मंदिर निर्माण का कार्य अब अपनी पूर्णता की ओर देख रहा है. ढ़ाई दशक पहले जिस विवादित बाबरी ढांचें का विध्वंस हुआ उसके स्थान पर राम लला तो विराजित हो गए किन्तु आज तक 25  वर्षों के पश्चात भी वहां पक्का मंदिर नहीं बन पाया है और […]

5 December 2017
 
Dr Kuldeep Agnihotri

जम्मू कश्मीर के इतिहास का एक भूला हुआ अध्याय – डा० कुलदीप चन्द अग्निहोत्री

पंडित जवाहर लाल नेहरु 1949 में लद्दाख आए थे । लद्दाख में उनकी मुलाक़ात उन्नीसवें कुशोग बकुला से मुलाक़ात हुई । नेहरु ने बकुला को प्रदेश की राजनीति में सक्रिय होने के लिए कहा । बकुला अवतारी पुरुष अर्थात टुलकु थे । वे राजनीति में आना नहीं चाहते थे लेकिन वे लद्दाख क्षेत्र के पिछड़ेपन […]

9 November 2017
 
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आज के ही दिन 22 अक्टूबर 1947 को पाकिस्तानी हमलावरों ने जम्मू कश्मीर रियासत पर हमला कर दिया था.

आज के ही दिन २२ अक्टूबर १९४७ को पाकिस्तानी हमलावरों ने जम्मू कश्मीर रियासत पर हमला कर दिया था जिस कारण हजारों परिवारों को मीरपुर जिले ,मुजफ्राबाद जिले और गिलगित -वलती से अपनी जान बचा कर जम्मू कश्मीर रियासत के दूसरे हिस्सों में पनाह लेनी पड़ी थी , कुछ तो भारत की अन्य रियासतों में भी चले गए […]

22 October 2017
 
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दशहरे का विरोध: विदेशी शक्तियों की नई चाल

 प्रसिद्द साहित्यकार हजारी प्रसाद द्विवेदी ने एक प्रख्यात निबंध लिखा है – “नाखून क्यों बढ़ते हैं”. प्रस्तुत संदर्भ में यह निबंध नितांत प्रासंगिक है. वस्तुतः नाखून हमारी बर्बरता, बुराई व दुर्गुणों का प्रतीक हैं जिनका समय समय पर बढ़ना मानवीय प्रक्रिया है और इन दुर्गुणों का नाश अर्थात नाखून काट लेना ही हममे सद्गुणों का […]

29 September 2017
 
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आतंकियों के सहयोगी रोहिंग्याइयों के हमदर्द शाही इमाम – प्रवीण गुगनानी

बांग्लादेशी घुसपैठियों का मामला पूर्व से ही देश के समक्ष एक चुनौती बन कर खड़ा हुआ है. आसाम और अन्य कुछ पूर्वोत्तर राज्यों में सामाजिक तानेबाने व स्थानीय शांति व्यवस्था के लिए घातक ख़तरा बन चुके ये घुसपैठिये तमाम प्रकार की आपराधिक व आतंकवादी गतिविधियों में संलग्न रहते हैं. मालदा जो कि मुस्लिम बहुल जिला […]

15 September 2017