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गुरुनानक देव जी की सीखें हर काल में प्रासंगिक रहेंगी- डॉ नीलम महेंद्र

गुरुनानक देव जी की सीखें हर काल में प्रासंगिक रहेंगी। ੴ ਸਤਿ ਨਾਮੁ ਕਰਤਾ ਪੁਰਖੁ ਨਿਰਭਉ ਨਿਰਵੈਰੁ ਅਕਾਲ ਮੂਰਤਿ ਅਜੂਨੀ ਸੈਭੰ ਗੁਰ ਪ੍ਰਸਾਦਿ ॥ ॥ ਜਪੁ ॥ ਆਦਿ ਸਚੁ ਜੁਗਾਦਿ ਸਚੁ ॥ ਹੈ ਭੀ ਸਚੁ ਨਾਨਕ ਹੋਸੀ ਭੀ ਸਚੁ ॥1॥ एक ओंकार सतनाम, कर्तापुरख, निर्माह निर्वैर, अकाल मूरत, अजूनी सभं. गुरु परसाद ॥ ॥ जप […]

30 November 2020
 

ब्रिगेडियर राजेन्द्र सिंह – भारतीय सेना के सैनिक सम्मान महावीर चक्र के प्रथम विजेता

जन्म – 14 जून सन 1899 ई. बगूना, सांबा, जम्मू संभाग.बलिदान पर्व – 27 अक्टूबर सन 1947 ई. सेरी, उडी सेक्टर, जम्मू कश्मीर. 22 अक्टूबर सन 1947 को महाराज हरिसिंह ने जब मुजफ्फराबाद पर पाक सेना के कब्जे की खबर सुनी, तो उन्होंने खुद दुश्मन से मोर्चा लेने का फैसला करते हुए सैन्य वर्दी पहनकर […]

27 October 2020
 

दत्तोपंत ठेंगड़ी – एक श्रेष्ठ चिंतक, संगठक और दीर्घदृष्टा – डॉ. मनमोहन वैद्य

जिस समय स्वर्गीय दत्तोपंत ठेंगड़ी जी ने भारतीय मजदूर संघ की स्थापना की वह साम्यवाद के वैश्विक आकर्षण, वर्चस्व और बोलबाले का समय था. उस परिस्थिति में राष्ट्रीय विचार से प्रेरित शुद्ध भारतीय विचार पर आधारित एक मजदूर आंदोलन की शुरुआत करना तथा अनेक विरोध और अवरोधों के बावजूद उसे लगातार बढ़ाते जाना यह पहाड़ […]

17 September 2020
 

ભારતમાં ‘વિશ્વ મૂળ નિવાસી દિવસનું ‘ શું ઔચિત્ય છે …? – પ્રશાંત પોલ

આવતીકાલે ‘વિશ્વ મૂળ નિવાસી દિવસ ‘ છે. ૧૯૯૪ માં સંયુક્ત રાષ્ટ્ર દ્વારા આ દિવસની ઘોષણા કરવામાં આવી હતી.  Working Group on Indigenous People ની પ્રથમ બેઠક ૯ ઓગસ્ટ ૧૯૮૨ માં મળી હતી. આથી ‘વિશ્વ મૂળ નિવાસી દિવસ’ ૯ ઓગસ્ટના રોજ ઉજવવામાં આવે છે. આની પાછળ સંયુક્ત રાષ્ટ્રની ભૂમિકા ખૂબ સ્પષ્ટ છે. તેમના કહેવા મુજબ, ૪૭.૬ કરોડ […]

8 August 2020
 

भारत में ‘विश्व मूल निवासी दिवस’ का औचित्य…? – प्रशांत पोळ

कल ‘विश्व मूल निवासी दिवस’ (World Indigenous Day) है. सन् 1994 में संयुक्त राष्ट्र संघ ने इस दिवस की घोषणा की थी. इस कल्पना को लेकर सन 1982 में Working Group on Indigenous People समूह की पहली बैठक 9 अगस्त को हुई थी. इसलिए 9 अगस्त को ‘विश्व मूल निवासी दिवस’ मनाया जाता है. इसके […]

8 August 2020
 

खिलाफत आंदोलन: पूर्ववर्ती सौ वर्ष डॉ. श्रीरंग गोडबोले

खिलाफत आंदोलन(1919-1924) मजहबी किताबों द्वारा स्वीकृत ऐसा आंदोलन था, जिसका भारत मे प्रारंभ उसी  समय हो गया था, जब पहले  इस्लामी आक्रमणकारी ने भारत की जमीन पर कदम रखा। आधुनिक काल में ओटोमन खलीफा की चर्चा  सूफियों, उलेमा, मध्यवर्गीय मुस्लिम बुद्धिजीवियों, मुस्लिम प्रेस और आम मुस्लिमों में 1830 के दशक के बाद से दिखाई देती […]

20 July 2020
 

ચીનનો પડકાર અને આપણો પ્રત્યુત્તર – પ્રજ્ઞા સિંહ

ચીની વસ્તુઓનું બહિષ્કાર કરવાનું અભિયાન દેશભરમાં જોરશોરથી ચાલી રહ્યું છે. કોરોનાની મહામારીને કારણે વિશ્વના દેશોનો ચીન પ્રતિ જોવાની દૃષ્ટિ  પણ  બદલાઈ રહી  છે. ભારત પણ સમજી રહ્યું છે કે હિન્દી-ચીની ભાઈ – ભાઈ હવે ના થઈ શકે. હવે પ્રશ્ન તે ઊભો થાય કે ચીની સામાનના બહિષ્કાર માટે આપણી તૈયારી પૂરી છે ? શું આપણે આ ચુનોતીને સામે લડવા તૈયાર […]

16 July 2020
 

खिलाफत: मजहबी-किताबी स्वीकृति एवं ऐतिहासिक पूर्वाधार डॉ.श्रीरंग गोडबोले

किसी दीनदार मुस्लिम के लिए, सिद्धांत (तालीम-व-तरबियत) विवेक पर हावी होता है। इस्लामी सिद्धांत के निम्न तीन स्रोत हैं- कुरान, हदीस (पैगंबर मुहम्मद के कथनी एवं व्यवहार का आधिकारिक विवरण) तथा सीरत (पैगंबर मुहम्मद की जीवनी) या सुन्नत (पैगंबर मुहम्मद द्वारा दी गई पद्धति या परंपरा)। व्यक्तिगत या सामाजिक स्तर पर, यह केवल मजहबी-किताबी स्वीकृति […]

13 July 2020
 

खिलाफत आंदोलन : प्रासंगिकता और विमर्श – डॉ. श्रीरंग गोडबोले

रांची, 10 जुलाई  : खिलाफत आंदोलन (1919-1924) भारतीय मुस्लिमों के बीच उत्पन्न हुए  एक तनाव का परिणाम था, जो प्रथम विश्व युद्ध के अंत में तुर्की ओटोमन साम्राज्य के विखंडन और तुर्की में खलीफा पद की समाप्ति की आशंका के परिणामस्वरूप प्रारम्भ हुआ था। खिलाफत आंदोलन की सर्वप्रमुख मांग खलीफा (शाब्दिकअर्थ:उत्तराधिकारी, पूरे विश्व के मुस्लिमों के […]

13 July 2020
 

आपातकाल की बड़ी भारी हथकड़ी और कोमल कलाई

देश मे आपातकाल लगाए जाने वाले काले 25 जून पर प्रतिवर्ष कुछ न कुछ लिखना मेरा प्रिय शगल रहा है। किंतु, आज जो मैं आपातकाल लिख रहा हूं, वह संभवतः इमर्जेंसी के सर्वाधिक कारुणिक कथाओं मे से एक कथा होगी। जिस देश मे मतदान की आयु शर्त 18 वर्ष हो व चुनाव लड़ने की 21 […]

25 June 2020