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एकात्म मानववाद – एक दिव्य सिद्धांत : प्रवीण गुगनानी

महान दार्शनिक प्लेटो के शिष्य व सिकंदर के गुरु अरस्तु ने कहा था – “विषमता का सबसे बुरा रूप है विषम चीजों को एक सामान बनाना।” The worst form of inequality is to try to make unequal things equal. एकात्म मानववाद, विषमता को इससे बहुत आगे के स्तर पर जाकर हमें समझाता है.          भारत को देश से बहुत […]

25 September 2018
 
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शिकागो संभाषण – भारत के विश्वगुरु बनने का मार्ग : प्रवीण गुगनानी

स्वामी विवेकानंद जी ने भारत को व भारतत्व को कितना आत्मसात कर लिया था, यह कविवर रविन्द्रनाथ टैगोर के इस कथन से समझा जा सकता है – “यदि आप भारत को समझना चाहते हैं तो स्वामी विवेकानंद को संपूर्णतः पढ़ लीजिये”. नोबेल सम्मानित फ्रांसीसी लेखक रोमां रोलां ने स्वामी जी के विषय में कहा था – “उनके द्वितीय […]

11 September 2018
 
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विमुक्ति दिवस : 31, अगस्त – आज स्वतंत्र हुए थे पारधी और अन्य घुमंतू जातियां –

यह आश्चर्य ही है कि हमारा देश और हम सभी नागरिक 15 अगस्त 1947 को स्वतंत्र हुए किंतु देश की घुमंतू जातियों के चार करोड़ लोगों का दर्जा तब भी कानूनी रूप से गुलाम का ही बना रहा. घुमंतू जातियों के इन गुलामों हेतु भारत सरकार ने 31 अगस्त 1952 को एक क़ानून बनाकर इन्हें […]

31 August 2018
 
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आंखों से बोलते थे अटल जी – प्रवीण गुगनानी

आंखों से बोलते थे अटल जी प्रसिद्ध दार्शनिक सुकरात ने कहा था कि “जिस देश का राजा कवि होगा उस देश में कोई दुखी न होगा” – अटल जी के प्रधानमंत्रित्व काल में यह बात चरितार्थ हो रही थी. स्वातंत्र्योत्तर भारत के नेताओं में कुछ ही ऐसे नेता हुए हैं जो विपक्षियों से भी सम्मान पातें हों. […]

16 August 2018
 
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सैफ़ुद्दीन सोज़ की किताब के बहाने , कश्मीर समस्या की जड़ की खोज– डा० कुलदीप चन्द अग्निहोत्री

जून के अंतिम दिनों में सोनिया कांग्रेस के एक बड़े नेता सैफ़ुद्दीन सोज़ की जम्मू कश्मीर को लेकर लिखी गई एक नई किताब Kashmir- Glimpses of History and the story of struggle  की चर्चा अख़बारों और टैलीविजन में शुरु हो गई थी । चर्चा को हवा देने के लिए सोज़ ने एक बयान जारी कर […]

10 August 2018
 
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वे पन्द्रह दिन… / 01 अगस्त, 1947 – प्रशांत पोळ

शुक्रवार, 01 अगस्त 1947. यह दिन अचानक ही महत्त्वपूर्ण बन गया. इस दिन कश्मीर के सम्बन्ध में दो प्रमुख घटनाएं घटीं, जो आगे चलकर बहुत महत्त्वपूर्ण सिद्ध होने वाली थीं. इन दोनों घटनाओं का आपस में वैसे तो कोई सम्बन्ध नहीं था, परन्तु आगे होने वाले रामायण-महाभारत में इनका स्थान आवश्यक होने वाला था. स्वतंत्रता […]

1 August 2018
 
Daya Sagar

महबूबा मुफ़्ती जी के सेल्फ रूल और कश्मीर घाटी की स्थिति पर विधान सभा में दिए गए वक्तव्य पर मोदी सरकार को स्थिति साफ़ करनी ही होगी – दया सागर

“एक बक्त  होता था जब कहीं  encounter   होता  था   तो  चार- चार  पाँच- पाँच गाँव लोग छोड़ कर चले जाते थे आज एनकाउंटर होता है चार –चार  पाँच- पाँच गांब से लोग आ के  पत्थर मारते  हैं!” महबूबा मुफ़्ती यहाँ एक ओर  भारत सरकार और दूसरे नेता यह कहते हैं कि कश्मीर घाटी ( जम्मू […]

19 February 2018
 
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स्वामी विवेकानंद: भारतीय संस्कृति के वैश्विक उद्घोषक

स्वामी विवेकानंद जी ने भारत को व भारतत्व को कितना आत्मसात कर लिया था यह कविवर रविन्द्रनाथ टैगोर के इस कथन से समझा जा सकता है जिसमें उन्होनें कहा था कि – “यदि आप भारत को समझना चाहते हैं तो स्वामी विवेकानंद को संपूर्णतः पढ़ लीजिये”. नोबेल से सम्मानित फ्रांसीसी लेखक रोमां रोलां ने स्वामी जी के […]

12 January 2018
 
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अयोध्या: तथ्य, तारीखें, हाशिम अली का बयान और मुस्लिमों का रूख

अयोध्या के राम जन्म भूमि स्थल पर भव्य मंदिर निर्माण का कार्य अब अपनी पूर्णता की ओर देख रहा है. ढ़ाई दशक पहले जिस विवादित बाबरी ढांचें का विध्वंस हुआ उसके स्थान पर राम लला तो विराजित हो गए किन्तु आज तक 25  वर्षों के पश्चात भी वहां पक्का मंदिर नहीं बन पाया है और […]

5 December 2017
 
Dr Kuldeep Agnihotri

जम्मू कश्मीर के इतिहास का एक भूला हुआ अध्याय – डा० कुलदीप चन्द अग्निहोत्री

पंडित जवाहर लाल नेहरु 1949 में लद्दाख आए थे । लद्दाख में उनकी मुलाक़ात उन्नीसवें कुशोग बकुला से मुलाक़ात हुई । नेहरु ने बकुला को प्रदेश की राजनीति में सक्रिय होने के लिए कहा । बकुला अवतारी पुरुष अर्थात टुलकु थे । वे राजनीति में आना नहीं चाहते थे लेकिन वे लद्दाख क्षेत्र के पिछड़ेपन […]

9 November 2017