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Dr Kuldeep Agnihotri

जम्मू कश्मीर के इतिहास का एक भूला हुआ अध्याय – डा० कुलदीप चन्द अग्निहोत्री

पंडित जवाहर लाल नेहरु 1949 में लद्दाख आए थे । लद्दाख में उनकी मुलाक़ात उन्नीसवें कुशोग बकुला से मुलाक़ात हुई । नेहरु ने बकुला को प्रदेश की राजनीति में सक्रिय होने के लिए कहा । बकुला अवतारी पुरुष अर्थात टुलकु थे । वे राजनीति में आना नहीं चाहते थे लेकिन वे लद्दाख क्षेत्र के पिछड़ेपन […]

9 November 2017
 
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आज के ही दिन 22 अक्टूबर 1947 को पाकिस्तानी हमलावरों ने जम्मू कश्मीर रियासत पर हमला कर दिया था.

आज के ही दिन २२ अक्टूबर १९४७ को पाकिस्तानी हमलावरों ने जम्मू कश्मीर रियासत पर हमला कर दिया था जिस कारण हजारों परिवारों को मीरपुर जिले ,मुजफ्राबाद जिले और गिलगित -वलती से अपनी जान बचा कर जम्मू कश्मीर रियासत के दूसरे हिस्सों में पनाह लेनी पड़ी थी , कुछ तो भारत की अन्य रियासतों में भी चले गए […]

22 October 2017
 
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दशहरे का विरोध: विदेशी शक्तियों की नई चाल

 प्रसिद्द साहित्यकार हजारी प्रसाद द्विवेदी ने एक प्रख्यात निबंध लिखा है – “नाखून क्यों बढ़ते हैं”. प्रस्तुत संदर्भ में यह निबंध नितांत प्रासंगिक है. वस्तुतः नाखून हमारी बर्बरता, बुराई व दुर्गुणों का प्रतीक हैं जिनका समय समय पर बढ़ना मानवीय प्रक्रिया है और इन दुर्गुणों का नाश अर्थात नाखून काट लेना ही हममे सद्गुणों का […]

29 September 2017
 
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आतंकियों के सहयोगी रोहिंग्याइयों के हमदर्द शाही इमाम – प्रवीण गुगनानी

बांग्लादेशी घुसपैठियों का मामला पूर्व से ही देश के समक्ष एक चुनौती बन कर खड़ा हुआ है. आसाम और अन्य कुछ पूर्वोत्तर राज्यों में सामाजिक तानेबाने व स्थानीय शांति व्यवस्था के लिए घातक ख़तरा बन चुके ये घुसपैठिये तमाम प्रकार की आपराधिक व आतंकवादी गतिविधियों में संलग्न रहते हैं. मालदा जो कि मुस्लिम बहुल जिला […]

15 September 2017
 
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9 अगस्त – विश्व मूल निवासी दिवस के परिप्रेक्ष में अमरीकी की जनजातियों की ऐतिहासिक शोकांतिका – श्री त्रिलोकीनाथ सिन्हा

सन 1492 में भारत की खोज में  कोलंबस निकला और पश्चिमी द्वीप समूह में पंहुचा A स्पैनिश यात्रियों को सोने की खोज में भारत (India) पहुचने का भ्रम हुआ इसलिए उस नई दुनिया को उसने India नाम दे दिया तथा उनके निवासियोंको इण्डियन कहना प्रारंभ किया A किन्तु जब पूर्व दिशा से वास्कोडिगामा के नेतृत्व […]

9 August 2017
 
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“बाबासाहेब” एक अनुकरणीय व्यक्तित्व – प्रवीण गुगनानी

हिन्दू समाहित जाति व्यवस्था को लेकर बोधिसत्व बाबा साहेब का जिस प्रकार का मुखर विरोध रहा वह किसी से छुपा नहीं है और यह विरोध उनकें द्वारा एक दीर्घ रचना संसार के रूप में प्रकट हुआ है. जाति व्यवस्था को ही लेकर महात्मा गांधी से उनका विरोध भी सर्व विदित है. किन्तु एक वाक्य है […]

13 April 2017
 
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कश्मीर के चुनाव में अब्दुल्ला परिवार की रणनीति – डा. कुलदीप चन्द अग्निहोत्री

पिछले चार पाँच महीनों से महरूम शेख़ अब्दुल्ला का परिवार  कश्मीर घाटी में बहुत बैचेन हो उठा था । घाटी में अब जब महरूम शेख अब्दुल्ला के परिवार की बात चलती है तो उसमें केवल दो का नाम ही लोगों की ज़ुबान पर चढ़ पाता है । सर्वप्रथम शेख़ अब्दुल्ला के सुपुत्र फारुक अब्दुल्ला का […]

2 April 2017
 
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हिन्दू धर्म के आदि रक्षक संत रैदास – प्रवीण गुगनानी

10 फर. माघ पूर्णिमा, संत रविदास जयंती पर विशेष – लगभग सवा छः सौ वर्ष पूर्व 1398 की माघ पूर्णिमा को काशी के मड़ुआडीह ग्राम में संतोख दास और कर्मा देवी के परिवार में जन्में संत रविदास यानि संत रैदास को निस्संदेह हम भारत में धर्मांतरण के विरोध में स्वर मुखर करनें वाली और स्वधर्म […]

9 February 2017
 
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तीन तलाक के मुद्दे पर प्रगतिशील बनें मुस्लिम समाज – प्रवीण गुगनानी

तीन तलाक पर प्रगतिशील बने मुस्लिम समाज : भारत में समान नागरिक संहिता पर विवाद कोई नया मामला नहीं है. केंद्र सरकार द्वारा तीन तलाक के विरोध में न्यायालय में हलफनामा दर्ज कराने के बाद यह विवाद पुनः उभर गया है. अब आल इंडिया मुस्लिम पर्सनल ला बोर्ड ने तीन तलाक के मुद्दे पर विधि […]

14 October 2016
 
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क्या है मूलनिवासी अवधारणा ? – प्रवीण गुगनानी

9 अगस्त मूलनिवासी दिवस पर विशेष – भारतीय दलित व जनजातीय समाज में इन दिनों एक नया शब्द चल पड़ा है, – मूलनिवासी. इस मूलनिवासी शब्द के नाम पर एक प्राचीन षड्यंत्र को नए रूप, नए कलेवर और नए आवरण में बांधकर एक विद्रूप वातावरण उत्पन्न करनें का प्रयास किया जा रहा है. मुझे लगता […]

8 August 2016