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क्या है मूलनिवासी अवधारणा ? – प्रवीण गुगनानी

9 अगस्त मूलनिवासी दिवस पर विशेष – भारतीय दलित व जनजातीय समाज में इन दिनों एक नया शब्द चल पड़ा है, – मूलनिवासी. इस मूलनिवासी शब्द के नाम पर एक प्राचीन षड्यंत्र को नए रूप, नए कलेवर और नए आवरण में बांधकर एक विद्रूप वातावरण उत्पन्न करनें का प्रयास किया जा रहा है. मुझे लगता […]

8 August 2016
 
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मोजाम्बिक से हिंदमहासागर में सशक्त भारत – प्रवीण गुगनानी

भारतीय वैश्विक नेता महात्मा गांधी के दक्षिण अफ्रीका से खासे सम्बंध रहे हैं. उस नाते से भारत में सदैव ही दक्षिण अफ्रीका का व अफ्रीका में महात्मा गांधी का सशक्त व सम्मानीय उल्लेख होता रहा है. इस स्थिति के बाद भी साढ़े तीन दशक के बाद नमो के रूप में कोई भारतीय प्रधानमंत्री दक्षिण अफ्रीका […]

14 July 2016
 
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अात्मघाती हमलावर मजहबी हैं या विक्षप्त ?

साभार न्यूज़ भारती (ओर्गेनाइजर में प्रकाशित प्रख्यात लेखिका मारिया विर्थ के अंग्रेजी लेख का हिन्दी रूपांतर) इतिहास के पन्नों में ईसाई धर्म और इस्लाम दोनों को भी साम्यवाद, फासीवाद और नाजीवाद के समान इंसानी जिंदगियां छीनने का दोषी मानकर दर्ज किया गया है! इसमें कोई शक नहीं है कि आज की दुनिया में भी यह […]

8 July 2016
 
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जाति व्यवस्था बनाम बाबासाहेब और गांधी – प्रवीण गुगनानी

जात जात के फेर में उलझ रहे सब लोग | मनुष्यता को खा रहा, रैदास जात का रोग || जात-जात में जात है, ज्यों केले में पात | रैदास मानस न जुड़ सकें, जब तक जात न जात || – संत रैदास बाबासाहेब अम्बेडकर के विचार विश्व का प्रारम्भ इस उनके इस कथन से माना […]

18 April 2016
 
Dilip-Dharurkar

नतद्रष्ट पर्यावरणवादियों को पवित्रता अभी याद आई ? – दिलीप धारूरकर

भारत के विरोधियों ने मानो पर्यावरण, पुनर्वास जैसे शब्दों का प्रयोग कूटशब्द की तरह इस देश की अस्मिता,  विकास और संस्कृति को विरोध करने के लिए करने की जैसै ठान ली है। प्राकृतिक संसाधनों  और तेज बुद्धी धारण  करनेवाले मानव संसधाधनों का वरदान प्राप्त भारत आनेवाले कुछ दिनों में विश्व की महासत्ता होगा, यह भविष्यवाणी […]

16 March 2016
 
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मुगल शासकों को महान बताना देश का अपमान है, जानिए क्यूँ ?

कुछ चाटुकार सेकुलरवादियों तथा वामपंथी इतिहासकारों ने मुगल शासनकाल में भारतीय राष्ट्रीयता की विवेचना तथा स्वरूप को तथ्यरहित तथा मनमाने ढंग से प्रस्तुत किया है। इन्होंने मुगल शासनकाल को भारत का ‘ शानदार युग’   तथा मुगल शासकों को ‘ महान ‘   बताया है। भारत के मुगल शासकों में पहले छह शासक ( 1526-1707) ही […]

9 February 2016
 
Dilip-Dharurkar

वेमुला की आत्महत्या पर राजनैतिक नौटंकी – दिलीप धारूरकर

भारतीय राजनीति में भाजपा विरोधकों के लिए अच्छा खासा अवरोध बन गया है। अब उसमें से बाहर निकलने के लिए चाहे जिस तरह के हथकंडे अपनाए जा रहे है । किसी भी कारण से कोई किसी का खूर करे अथवा किसी भी कारण से कोई आत्महत्या करे, कांग्रेस, वामपंथी और अन्य चाहे जिस तरह से […]

27 January 2016
 

विश्वगुरु भारत के प्रखर प्रतीक – स्वामी विवेकानंद :- प्रवीण गुगनानी

स्वामी विवेकानंद जी ने भारत को व भारतत्व को कितना आत्मसात कर लिया था यह कविवर रविन्द्रनाथ टैगोर के इस कथन से समझा जा सकता है जिसमें उन्होनें कहा था कि – “यदि आप भारत को समझना चाहते हैं तो स्वामी विवेकानंद को संपूर्णतः पढ़ लीजिये”. नोबेल से सम्मानित फ्रांसीसी लेखक रोमां रोलां ने स्वामी […]

12 January 2016
 
Vijay Thaker

असहिष्णुता : राजनीती नहीं राष्ट्रनीति पर प्रहार – विजय ठाकर

बिहार चुनाव से पहेले भारत में असहिष्णुता बढ़ रही है ऐसी बाते बार बार उठी I जैसे ही बिहार चुनाव ख़तम हुआ तुरंत ये आवाजे दब गई I कुछ विश्लेषको ने कहेना शुरू कर दिया की बस अब ये असहिष्णुता अगले किसी चुनाव में ही बढ़ेगी I और अचानक आमिर खान का बयान आया की […]

26 November 2015
 
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आमिर-शाहरुख़, आप इस देश के लायक ही नहीं हैं – सिद्धार्थ शंकर गौतम

सोमवार शाम एक निजी अखबार समूह के पुरस्कार समारोह में मशहूर अभिनेता आमिर खान ने कुंद पड़ चुके असहिष्णुता के मुद्दे को पुनः धार दे दी। उन्होंने कहा कि उनकी पत्नी; फिल्म निर्मात्री किरण राव देश में बढ़ रही असहिष्णुता से घबराती हैं और एक बार उनसे देश छोड़ने को कह चुकी हैं। इससे पूर्व […]

24 November 2015