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काकोरी कांड – अंग्रेज़ियत से मुक्ति दिलवाना था क्रांतिकारियों का उद्देश्य – अमित त्यागी

सारे जहां में जिसका है नाम, सर ज़मीनों हिंदोस्तान, रोशन है जिससे ये आसमान, ऐसे थे बिस्मिल अशफ़ा के राम॥ शाहजहाँपुर रेलवे स्टेशन पर अंकित लेखक (अमित त्यागी) की ये पंक्तियाँ शाहजहाँपुर आने वाले सैलानियों का स्वागत एवं एवं काकोरी कांड के नायकों को श्रद्धांजलि अर्पित करती हैं। वास्तव में काकोरी कांड सिर्फ खज़ाना लूटने […]

19 December 2019
 

कैब (CAB) : नागरिकता संशोधन बिल – 1947 का कार्य 2019 मे हुआ पूर्ण

तो अंततः देश विभाजन के तुरंत बाद किया जाने वाला बहू प्रतीक्षित व प्राकृतिक न्याय वाला कार्य अब पूर्ण हुआ और संसद ने नागरिकता संशोधन बिल पारित कर दिया।  चाणक्य ने कहा था कि ऋण, शत्रु और रोग को समय रहते ही समाप्त कर देना चाहिए। जब तक शरीर स्वस्थ और आपके नियंत्रण में है, […]

12 December 2019
 

दत्तोपंत ठेंगड़ी: प्रखर, प्रचंड किंतु संवेदनशील मजदूर नेता

कभी हुआ करता था कि मजदूर संगठन की बात घोर पूंजीपति विरोध से ही प्रारंभ हुआ करती थी। रोजगार देने वाले व रोजगार प्राप्त करने वाले मे सौहाद्र, समन्वय व संतोष की न तो कामना की जाये और न ही आशा की जाये, यही कार्ल मार्क्स के मजदूरों को दिये गए संदेश का अर्थ था। कम्युनिस्टों के […]

10 November 2019
 

ज्ञान का चरम हैं नारद – जे. नन्द कुमार

नारद जयंती (20 मई) पर विशेष ज्येष्ठ कृष्ण द्वितीया को नारद जयन्ती होती है, जो इस बार 20 मई को है. पिछले कई वर्षों से राष्ट्रवादी लोग इस दिन को पत्रकारिता दिवस के रूप में मनाते हैं. नारद सृष्टि के पहले संवाददाता माने जाते हैं. हिन्दी फिल्मों और सेकुलर विमर्शकारों द्वारा उन्हें नकारात्मक चरित्र और […]

20 May 2019
 

मध्यप्रदेश – गांव हो तो बघुवार जैसा

असली भारत गांवों में बसता है। यदि किसी आदर्श गाँव को देखना चाहते हैं तो मध्यप्रदेश के नरसिंहपुर जिले के बघुवार गांव चलिए। साफ सुथरी सड़कें, भूमिगत नालियां, हर घर में शौचालय, खेलने के लिए इनडोर स्टेडियम, खाना बनाने के लिए बायोगैस संयत्र। वर्षों से गांव का कोई विवाद थाने तक नहीं पहुंचा। स्कूल व […]

30 March 2019
 

एकात्म मानववाद – एक दिव्य सिद्धांत : प्रवीण गुगनानी

महान दार्शनिक प्लेटो के शिष्य व सिकंदर के गुरु अरस्तु ने कहा था – “विषमता का सबसे बुरा रूप है विषम चीजों को एक सामान बनाना।” The worst form of inequality is to try to make unequal things equal. एकात्म मानववाद, विषमता को इससे बहुत आगे के स्तर पर जाकर हमें समझाता है.          भारत को देश से बहुत […]

25 September 2018
 

शिकागो संभाषण – भारत के विश्वगुरु बनने का मार्ग : प्रवीण गुगनानी

स्वामी विवेकानंद जी ने भारत को व भारतत्व को कितना आत्मसात कर लिया था, यह कविवर रविन्द्रनाथ टैगोर के इस कथन से समझा जा सकता है – “यदि आप भारत को समझना चाहते हैं तो स्वामी विवेकानंद को संपूर्णतः पढ़ लीजिये”. नोबेल सम्मानित फ्रांसीसी लेखक रोमां रोलां ने स्वामी जी के विषय में कहा था – “उनके द्वितीय […]

11 September 2018
 

विमुक्ति दिवस : 31, अगस्त – आज स्वतंत्र हुए थे पारधी और अन्य घुमंतू जातियां –

यह आश्चर्य ही है कि हमारा देश और हम सभी नागरिक 15 अगस्त 1947 को स्वतंत्र हुए किंतु देश की घुमंतू जातियों के चार करोड़ लोगों का दर्जा तब भी कानूनी रूप से गुलाम का ही बना रहा. घुमंतू जातियों के इन गुलामों हेतु भारत सरकार ने 31 अगस्त 1952 को एक क़ानून बनाकर इन्हें […]

31 August 2018
 

आंखों से बोलते थे अटल जी – प्रवीण गुगनानी

आंखों से बोलते थे अटल जी प्रसिद्ध दार्शनिक सुकरात ने कहा था कि “जिस देश का राजा कवि होगा उस देश में कोई दुखी न होगा” – अटल जी के प्रधानमंत्रित्व काल में यह बात चरितार्थ हो रही थी. स्वातंत्र्योत्तर भारत के नेताओं में कुछ ही ऐसे नेता हुए हैं जो विपक्षियों से भी सम्मान पातें हों. […]

16 August 2018
 

सैफ़ुद्दीन सोज़ की किताब के बहाने , कश्मीर समस्या की जड़ की खोज– डा० कुलदीप चन्द अग्निहोत्री

जून के अंतिम दिनों में सोनिया कांग्रेस के एक बड़े नेता सैफ़ुद्दीन सोज़ की जम्मू कश्मीर को लेकर लिखी गई एक नई किताब Kashmir- Glimpses of History and the story of struggle  की चर्चा अख़बारों और टैलीविजन में शुरु हो गई थी । चर्चा को हवा देने के लिए सोज़ ने एक बयान जारी कर […]

10 August 2018