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Dilip-Dharurkar

वेमुला की आत्महत्या पर राजनैतिक नौटंकी – दिलीप धारूरकर

भारतीय राजनीति में भाजपा विरोधकों के लिए अच्छा खासा अवरोध बन गया है। अब उसमें से बाहर निकलने के लिए चाहे जिस तरह के हथकंडे अपनाए जा रहे है । किसी भी कारण से कोई किसी का खूर करे अथवा किसी भी कारण से कोई आत्महत्या करे, कांग्रेस, वामपंथी और अन्य चाहे जिस तरह से […]

27 January 2016
 

विश्वगुरु भारत के प्रखर प्रतीक – स्वामी विवेकानंद :- प्रवीण गुगनानी

स्वामी विवेकानंद जी ने भारत को व भारतत्व को कितना आत्मसात कर लिया था यह कविवर रविन्द्रनाथ टैगोर के इस कथन से समझा जा सकता है जिसमें उन्होनें कहा था कि – “यदि आप भारत को समझना चाहते हैं तो स्वामी विवेकानंद को संपूर्णतः पढ़ लीजिये”. नोबेल से सम्मानित फ्रांसीसी लेखक रोमां रोलां ने स्वामी […]

12 January 2016
 
Vijay Thaker

असहिष्णुता : राजनीती नहीं राष्ट्रनीति पर प्रहार – विजय ठाकर

बिहार चुनाव से पहेले भारत में असहिष्णुता बढ़ रही है ऐसी बाते बार बार उठी I जैसे ही बिहार चुनाव ख़तम हुआ तुरंत ये आवाजे दब गई I कुछ विश्लेषको ने कहेना शुरू कर दिया की बस अब ये असहिष्णुता अगले किसी चुनाव में ही बढ़ेगी I और अचानक आमिर खान का बयान आया की […]

26 November 2015
 
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आमिर-शाहरुख़, आप इस देश के लायक ही नहीं हैं – सिद्धार्थ शंकर गौतम

सोमवार शाम एक निजी अखबार समूह के पुरस्कार समारोह में मशहूर अभिनेता आमिर खान ने कुंद पड़ चुके असहिष्णुता के मुद्दे को पुनः धार दे दी। उन्होंने कहा कि उनकी पत्नी; फिल्म निर्मात्री किरण राव देश में बढ़ रही असहिष्णुता से घबराती हैं और एक बार उनसे देश छोड़ने को कह चुकी हैं। इससे पूर्व […]

24 November 2015
 
Dilip Dharurkar

टीपू के महीमामंडन का रोग – दिलीप धारूरकर

इस देश के सभी वामपंथी, समाजवादी और अवसरवादी कांग्रेसी एक रोग से पीड़ीत है। जैसे जैसे इस देश में हिंदूवादी संगठनों और हिंदुवादी राजनीतिक दलों को जनता का समर्थन मिलने लगा है, यह रोग और भी बढ़ रहा है। ‘जो जो हिंदुओं के हीत में और गौरवमय हो उसे कमतर और असहिष्णु साबित करना और […]

21 November 2015
 
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સામ્પ્રંત સમયનો સંદેશ – ડૉ. જયંતિભાઈ ભાડેસિયા

આપણો દેશ ભારત દુનિયાની સૌથી જૂની સંસ્કૃતિનો વાહક છે.દુનીયામાં ઉદ્ભવેલી અને વિકસિત થયેલી અનેક સંસ્કૃતિ મૃતપાય થયી ગયી છે ત્યારે આપણી સંસ્કૃતિ ટકી રહી તેનાં મુળમાં રહેલ અનેક કારણો માંહેનું એક છે અહીનો પુત્રવત હિન્દુ સમાજ . વિવીધતામાં એકતા ધરાવનાર આ સમાજ ના વિશેષ જીવન મુલ્યો , જીવન દર્શન અને જીવન વ્યવહાર ના કારણે આપણે […]

13 October 2015
 
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संयुक्त राष्ट्र में आजम का पत्र बनाम संयुक्त राष्ट्र का गौ समर्थन !! – प्रवीण गुगनानी

गत सप्ताह संयुक्त राष्ट्र संघ के उल्लेख वाली दो घटनाएं देश भर के ध्यान में रही. इन दोनों घटनाओं का दीर्घकालीन प्रभाव भारत में और विश्व में देखनें को मिलता रहेगा. वैसे आजम खान जिस प्रकार की राजनैतिक प्रवृत्तियों के लती और नशेड़ी रहें हैं उस अनुसार उनके लिए राष्ट्र विरोध, संविधान उल्लंघन, देश विद्रोह […]

13 October 2015
 
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हम सुधरेंगे तभी बच पाएंगी नदियां – प्रियंका कौशल

गंगे च यमुने चैव गोदावरी सरस्वती। नर्मदे सिंधुकावेरीजलेsस्मिंन् सन्निधिं कुरू।। यह सब जानते हैं कि  नदियां जीवनदायिनी होती हैं। किसी भी राष्ट्र के सामाजिक, राजनीतिक, आर्थिक, भौतिक एवं सांस्कृतिक  इतिहास और विकास में इनका स्थान विशिष्ट होता है। इतिहास हमें बताता है कि आदिकाल से ही सभ्यताओं का विकास नदियों के किनारे हुआ है। खासकर […]

13 October 2015
 
 
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बाबासाहेब की अंतर्दृष्टि के अनुरूप हैं संघप्रमुख के विचार

प्रवीण गुगनानी : – सरसंघचालकजी अर्थात राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ, प्रमुख मोहन रावजी भागवत के आरक्षण व्यवस्था पर पुनर्विचार की आवश्यकता व्यक्त करनें से वैचारिक तूफ़ान खड़ा हो गया है. संघप्रमुख ने आरक्षण के औचित्य पर प्रश्न कतई नहीं किया है, यह स्पष्ट है. मीडिया ने जानबूझकर उनसे बीते वर्षों में समय समय पर सार्वजनिक […]

22 September 2015