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राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले का वक्तव्य

7 मई, 2021

लोकतंत्र में चुनावों की एक महत्वपूर्ण भूमिका होती है. चुनावों के इसी क्रम में पश्चिम बंगाल का चुनाव अभी-अभी सम्पन्न हुआ है. बंगाल के सम्पूर्ण समाज ने इसमें बढ़-चढ़ कर सहभाग लिया है. चुनावों में स्वाभाविक ही पक्ष-विपक्ष, आरोप-प्रत्यारोप कभी-कभी भावावेश में मर्यादाओं को भी पार कर देता है. पर, हमें यह सदैव स्मरण रखना होगा कि सभी दल अपने ही देश के दल हैं और चुनावों की प्रक्रिया में भाग लेने वाले प्रत्याशी, समर्थक, मतदाता सभी अपने ही देश के नागरिक हैं.

चुनाव परिणाम के तुरंत बाद उन्मुक्त होकर अनियंत्रित तरीक़े से हुई राज्यव्यापी हिंसा न केवल निंदनीय है, बल्कि पूर्व नियोजित भी है. समाज-विघातक शक्तियों ने महिलाओं के साथ घृणास्पद बर्बर व्यवहार किया, निर्दोष लोगों की क्रूरतापूर्ण हत्याएँ कीं, घरों को जलाया, व्यवसायिक प्रतिष्ठानों-दुकानों को लूटा एवं हिंसा के फलस्वरूप अनुसूचित जाति-जनजाति समाज के बंधुओं सहित हज़ारों लोग अपने घरों से बेघर होकर प्राण-मान रक्षा के लिए सुरक्षित स्थानों पर शरण के लिए मजबूर हुए हैं. कूच-बिहार से लेकर सुंदरबन तक सर्वत्र जन सामान्य में भय का वातावरण बना हुआ है.

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ इस वीभत्स हिंसा की कठोर शब्दों में निंदा करता है. हमारा यह सुविचारित मत है कि चुनाव-परिणामों के पश्चात अनियंत्रित चल रही हिंसा भारत की सह-अस्तित्व और सबके मतों का सम्मान करने की परंपरा के साथ-साथ भारतीय संविधान में अंकित एक जन और लोकतंत्र की मूल भावना के भी विपरीत है.

इस पाशविक हिंसा का सर्वाधिक दुखद पक्ष यह है कि शासन और प्रशासन की भूमिका केवल मूक दर्शक की ही दिखाई दे रही है. दंगाइयों को ना ही कोई डर दिखाई दे रहा है और ना ही शासन-प्रशासन की ओर से नियंत्रण की कोई प्रभावी पहल दिखाई दे रही है.

शासन-व्यवस्था कोई भी हो, किसी भी दल की हो, उस का सर्वप्रथम दायित्व समाज में क़ानून-व्यवस्था के द्वारा शांति और सुरक्षा का वातावरण बनाना, अपराधी और समाज-विरोधी तत्वों के मन में शासन का भय पैदा करना और हिंसक गतिविधियाँ करने वालों को दंड सुनिश्चित करना होता है. चुनाव को दल जीतते हैं, पर, निर्वाचित सरकार पूरे समाज के प्रति जवाबदेह होती है. हम नव निर्वाचित सरकार से यह आग्रह करते हैं कि उसकी सर्वोच्च प्राथमिकता राज्य में चल रही हिंसा को तुरंत समाप्त कर क़ानून का शासन स्थापित करना, दोषियों को अविलंब गिरफ्तार कर कठोर कार्रवाई सुनिश्चित करना, हिंसा-पीड़ितों के मन में विश्वास और सुरक्षा का भाव पैदा कर पुनर्वास के लिए आवश्यक कदम उठाना, होनी चाहिए. हम केंद्र सरकार से भी आग्रह करते है कि वह बंगाल में शान्ति क़ायम करने हेतु आवश्यक हर सम्भव कदम उठाए एवं यह सुनिश्चित करे कि राज्य सरकार भी इसी दिशा में कार्रवाई करे.

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ समाज के सभी प्रबुद्ध जनों, सामाजिक-धार्मिक-राजनैतिक नेतृत्व का भी आहवान करता है कि इस संकट की घड़ी में वे पीड़ित परिवारों के साथ खड़े हो कर विश्वास का वातावरण बनाएं, हिंसा की कठोर शब्दों में निंदा करें एवं समाज में सद्भाव और शांति व भाईचारे का वातावरण खड़ा करने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभायें.

219 स्थानों पर स्वयंसेवकों द्वारा कोविड अस्पतालों में प्रशासन का सहयोग

स्वयंसेवकों ने 43 प्रमुख शहरों में कोविड सेवा केंद्र, 2442  टीकाकरण केंद्र, 10000 टीकाकरण जागरूकता अभियान शुरू किये

नई दिल्‍ली. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख सुनील आंबेकर ने कहा कि कोरोना के इस क्रूर प्रहार से देश के कई हिस्से प्रभावित हुए हैं। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ कोरोना की महामारी में दिवंगत सभी को श्रद्धांजलि अर्पित करता है। डॉक्टरों व चिकित्सा के अन्य कार्य तथा ऑक्सीजन आदि सामग्री की आपूर्ति में लगे कर्मचारी एवं सुरक्षा व स्वच्छता कर्मियों सहित सभी कोरोना योद्धाओं का योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि हमारे समाज की संवेदना व सक्रियता अद्भुत है। अपनी जान जोखिम में डालकर संकट की स्थिति में कार्य कर रहे हैं। परिस्थिति भले ही विकट हो, भारत में समाज की शक्ति भी विशाल है।

सुनील आंबेकर डिजिटल माध्यम से आयोजित प्रेस वार्ता में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ तथा सेवा भारती द्वारा चलाए जा रहे सेवा कार्यों के संबंध में जानकारी प्रदान कर रहे थे।

उन्होंने कहा कि हमेशा की तरह राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, सेवाभारती सहित अन्य संगठन व संस्थाएं प्रभावित क्षेत्रों व परिवारों में राहत पहुंचाने के काम में जुटे हैं। संघ की पहल पर आवश्यकता के अनुसार अभी बारह प्रकार के कार्य प्राथमिकता से प्रारंभ हुए हैं।

उन्होंने कहा कि कोविड के संभावित लोगों हेतु आइसोलेशन केंद्र व पॉज़िटिव रोगियों हेतु कोविड केअर (सेवा) केंद्र, सरकारी कोविड केंद्र व अस्पतालों में सहायता, सहायता हेतु दूरभाष (हेल्पलाइन नंबर), रक्तदान, प्लाज्मादान, अंतिम संस्कार के कार्य, आयुर्वेदिक काढ़ा वितरण, समुपदेशन (काउंसलिंग), ऑक्सीजन आपूर्ति व एम्बुलेंस सेवा, भोजन, राशन व मास्क तथा टीकाकरण अभियान व जागरूकता जैसे आवश्यक कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर तत्काल कई प्रांतों में स्वयंसेवकों द्वारा प्रारंभ किया गया है। स्थानीय प्रशासन की भी हर संभव सहायता की जा रही है ताकि सभी मिलकर इस चुनौती पर विजय प्राप्त कर सकें। इंदौर में संघ की पहल पर शासन, निजी अस्पताल, राधा स्वामी संत्संग आदि के सहयोग से दो हज़ार बिस्तर का कोविड केंद्र शासन व समाज के समन्वित कार्य का उत्कृष्ट उदाहरण बन गया है।

उन्होंने कहा कि स्वयंसेवकों द्वारा अभी 43 प्रमुख शहरों में कोविड सेवा केंद्र चलाए जा रहे हैं तथा अन्य 219 स्थानों पर कोविड अस्पतालों में प्रशासन का सहयोग किया जा रहा है। टीकाकरण हेतु दस हजार से अधिक स्थानों पर जागरूकता अभियान के साथ 2442 टीकाकरण केंद्र अभी तक प्रारंभ किये गए हैं।

उन्होंने कहा कि समाज के सभी लोगों का इस कार्य में सहयोग आवश्यक है, तथा कोरोना के प्रकोप पर शासन-प्रशासन व समाज के समन्वित प्रयास से ही भारत विजय प्राप्त करेगा।

एक प्रश्न के उत्तर में उन्होंने बताया कि आवश्यकता के अनुसार प्लाज्मा व रक्तदान में सहयोग किया जा रहा है, कुछ स्थानों पर संभावितों की सूची भी बनी है। दिल्ली में रक्तदाताओं की सूची उपलब्ध है। पूणे में जनजागरण अभियान के माध्यम से 600 लोगों ने प्लाज्मा डोनेट किया, जिससे 1500 लोगों का जीवन बचाने में सहायता मिली।

एक अन्य प्रश्न के उत्तर में कहा कि विभिन्न शहरों में बुजुर्गों व अकेले रहने वालों को ध्यान में रखते हुए हेल्पलाइन नंबर जारी किए गए हैं। इनके माध्यम से जरूरतमंदों को आवश्यक सहायता उपलब्ध करवाई जा रही है।

સરકાર્યવાહ મા. દત્તાત્રેય હોસ્બોલે (દત્તાજી) નું નિવેદન

કોવિડ રોગચાળાએ ફરી એકવાર આપણા રાષ્ટ્ર માટે એક ભયાનક  પડકાર ઉભો કર્યો છે. મહામારી ની સંક્રમણ શક્તિ અને ભીષણતા પહેલા થી વધારે  ગંભીર છે. આજે, આપણા દેશના મોટાભાગના ભાગોમાં  તેની અસર છે. મોટી સંખ્યામાં લોકો સંક્રમિત થઇ  રહ્યા છે અને તેમને હોસ્પિટલોમાં દાખલ કરવાની આવશ્યકતા ઉભી થઇ રહી છે.. સેંકડો પરિવારો તેમના નજીકના અને પ્રિયજનો ને ગુમાવી ચૂક્યા છે. રાષ્ટ્રીય સ્વયંસેવક સંઘ આ દુર્ઘટનાથી પ્રભાવિત એવા બધા લોકો પ્રત્યે સંવેદના વ્યક્ત કરે છે.
 
પરિસ્થિતિ નાજુક છે તેમ છતાં  સમાજની તાકાત પણ ઓછી નથી. વિષમ પરિસ્થિતિઓ સામે ઝુઝ્વાની આપણી શક્તિ જગ જાણીતી છે. આપણો એ વિશ્વાસ કે આપણે ધૈર્ય તેમજ મનોબળ જાળવી ને, સંયમ અને અનુશાસન તેમજ પરસ્પર સહયોગ દ્વારા આપણેઆ ભીષણ પરિસ્થિતિ માં પણ અવશ્ય વિજયી બની શું.
 
અચાનક રોગચાળો વકરવાના કારણે લોકોને હોસ્પિટલોમાં પથારી, ઓક્સિજન અને જરૂરી દવાઓની તંગીનો સામનો કરવો પડી રહ્યો છે. ભારત જેવા વિશાળ સમાજમાં, સમસ્યાઓ ઘણીવાર વિશાળ પ્રમાણમાં ઉભી થાય છે. આ પડકારોનો સામનો કરવા માટે કેન્દ્ર અને રાજ્ય સરકારો ના શાસન, પ્રશાસન તેમજ સ્થાનિક સ્વરાજ ની સંસ્થાઓ દ્વારા સમસ્યા ના નિરાકરણ માટે  વિસ્તૃત પ્રયાસો કરવામાં આવી રહ્યા છે. પોતાના જીવનને દાવ પર લગાવી, ડોકટરો,સુરક્ષા કર્મચારીઓ અને સ્વચ્છતા કર્મચારીઓ પહેલાની જેમ પોતાની જવાબદારી નિભાવી રહ્યા છે. રાષ્ટ્રીય સ્વયંસેવક સંઘના સ્વયંસેવકો, હંમેશની જેમ, સમાજની જરૂરિયાતોને પૂર્ણ કરવા માટે દેશભરમાં વિવિધ પ્રકારની સેવાઓ સક્રિય રીતે ચલાવી રહ્યા છે. પડકારની ગંભીરતાને સમજી ને અનેક સામાજિક અને ધાર્મિક સંસ્થાઓ ની સાથે  સામાન્ય સમાજ પ[પણ સ્વેચ્છાએ તમામ પ્રકારના પ્રયત્નોમાં સામેલ થયો છે.
 
સંભવ છે કે સમાજમાં વિનાશક અને ભારત વિરોધી શક્તિઓ આ પ્રતિકૂળ સંજોગોનો લાભ લઈ દેશમાં નકારાત્મકતા અને અવિશ્વાસનું વાતાવરણ ઉભું કરી શકે. દેશના લોકોએ પરિસ્થિતિ હલ કરવાના તેમના સકારાત્મક પ્રયાસો સિવાય પણ આ વિનાશક શક્તિઓના કાવતરાંથી સાવધ રહેવું જરૂરી  છે.
 
રાષ્ટ્રીય સ્વયંસેવક સંઘ, સ્વયંસેવકોને , સામાજિક, ધાર્મિક અને સેવા સંસ્થાઓ અને સંગઠનોને, અને વાણિજ્યિક અને ઉદ્યોગ ક્ષેત્રના લોકોને પણ હાલના પડકારોને નિવારવા ત્વરિત અને સેવાની ભાવના સાથે આગળ આવવા અને કોઈપણ પ્રકારની અછતને પહોંચી વળવા કોઈ કસર નહી છોડવા ની અપીલ કરે છે.
 
વર્તમાન પરિસ્થિતિને ધ્યાનમાં રાખીને, બધાએ કેટલીક મહત્વપૂર્ણ બાબતો પર ધ્યાન આપવું જરૂરી છે જેમ કે:
 
Ø  આરોગ્ય અને શિસ્ત અંગેના નિયમોનું પાલન કરવું. કોરોના સંબંધિત સેવાઓ કરી રહેલા  લોકોએ અતિરિક્ત કાળજી લેવી જોઈએ.
 
Ø  માસ્ક નો ઉપયોગ, સ્વચ્છતા, શારીરિક અંતર, ખાનગી અને જાહેર કાર્યક્રમોમાં સંખ્યાની મર્યાદા, કર્ફ્યુ જેવા નિયમો, અને આયુર્વેદિક ઉકાળા લેવા, વરાળ અને રસીકરણ જેવા સ્વાસ્થ્ય સંબંધિત પ્રશ્નો વિશે જાગૃતિ લાવવી.
Ø  જ્યારે  એકદમ જરૂરી હોય ત્યારે ઘરની બહાર જવું.. રાષ્ટ્રીય સ્વયંસેવક સંઘ  અપીલ કરે છે કે સ્થાનિક સ્તરે દૈનિક પ્રવૃત્તિઓને જાતે જ સામૂહિક નિર્ણય દ્વારા નિયંત્રિત કરવી.
 
Ø  ડોકટરો, તબીબી કર્મચારીઓ, સુરક્ષા કર્મચારીઓ અને સ્વચ્છતા કર્મચારીઓ તેમજ વહીવટી તંત્ર સાથે તમામ સ્તરે સંપૂર્ણ સહકાર કરવો.
 
 
Ø   મીડિયા સહિત સમાજના તમામ વર્ગને સમાજમાં સકારાત્મકતા, આશા અને વિશ્વાસનું વાતાવરણ જાળવવામાં યોગદાન આપવા વિનંતી છે.
 
Ø  જેઓ સોશિયલ મીડિયામાં સક્રિય છે તેઓએ વધુ સંયમ અને જાગૃત રહી ને સકારાત્મક ભૂમિકા ભજવવી જોઈએ.

सर्दी, गर्मी और वर्षा हर मौसम में पैरों में हवाई चप्पल तन पर बेहद साधारण कुर्ता-धोती पहने तलासरी के बीहड़ वनवासी गांवों में लम्बी लम्बी दूरी पैदल चलकर वहां के बच्चों के लिए ज्ञान के दरवाजे खोलने वाले माधवराव जी काणे  का जीवन 50 वर्षों के समपर्ण की वो कथा है, जो इस पीढी को पढ़ना भी चाहिए और पढाना भी।

15 दिसम्बर 1927 को कल्याण के एक मध्यमवर्गीय परिवार में जन्मे माधवराव काणे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के उन प्रचारकों में से एक थे जिनकी जीवन यात्रा से ही संघ को समझा जा सकता है। महाराष्ट्र के ठाणे जिले के तलासरी तालुका मे वनवासी बालको को पढ़ाने व आगे बढाने के लिए जीवन के 28 वर्ष समर्पित करने वाले काणे जी जीवन भर सिर्फ औरों के लिए जिए।
युवावस्था में गोवा मुक्ति के संघर्ष में अंत तक सत्याग्रही की भुमिका निभाने वाले माधवराव जी आगे जाकर 1964 में कल्याण नगर पालिका में देश के सबसे युवा अध्यक्ष बने। कल्याण नगर पालिका में उनके कार्यकाल को बेहद सफल माना जाता है।
किंतु इस आधुनिक तपस्वी ने अपने गुरू व कल्याण के विभाग प्रचारक दामू अन्ना टोकेकर जी के आह्वान पर राजनीति में अपने चमकते कैरियर को त्याग कर वनवासियों की सेवा के लिए तलासरी के बीहडों की ओर रूख कर लिया।

काणे जी के अथक प्रयासों से 1967 में हिंदू सेवा संघ के द्वारा मात्र 5 विद्यार्थीयों से एक झोपडी में वनवासी बस्ती गृह के नाम से जनजाती बालको को पढ़ाने के लिए एक छात्रावास की शुरूआत की। बाद में काणे जी के प्रयासों से पौने दस एकड़ भूमि छात्रावास को दान में मिली।
इस छात्रावास में रहकर विगत 55 वर्षों में 2000 से अधिक बच्चे पढ कर जीवन के अनेकों क्षेत्रो में आगे बढ़े हैं। यहां से ड़ॉक्टर, इंजीनियर एवं अनेक उच्च पदों पर आसीन होने वाले विद्यार्थियों को संस्कारित कर उन्हें अच्छा व सफल इंसान बनाने के लिए माधवराव जी अनवरत 28 वर्ष पूर्ण समर्पण से इस कार्य में लगे रहे। कभी-कभी तो वह विद्यार्थियों के परिवार से मिलने के लिए कई किलोमीटर पैदल चलकर उनके घर जाते थे।

माधवराव जी के साथ प्रतिछाया बनकर छात्रावास का प्रबंधन संभालने वाले संघ के तृतीय वर्ष शिक्षित स्वयंसेवक अप्पा जी जोशी बताते हैं कि- “माधवराव जी वास्तव में आधुनिक जमाने के संत थे।” वे सदैव खटिया पर सोते थे,झोपडी में रहते थे व पैदल ही प्रवास करते थे। उनके ही प्रयासों से तलासरी दहानू व पालघर में नक्सलवाद जड़ से समाप्त हो गया।”

कल्याण में 24 वर्ष लगातार उनका कमरा वनवासी बच्चों के लिए घर बन गया। केवल 17 वर्ष की उम्र में अपने माता-पिता को खोने वाले माधवराव जी को जब अंतिम समय में कैंसर हुआ तो उन्होंने ड़ॉक्टरों से आग्रह किया कि उनके इलाज में लगने वाला खर्च छात्रावास में लगा दिया जाए,  क्योंकि उनके अनुसार वे तो अपनी यात्रा पुर्ण कर चुके थे। “प्रसिद्धि की जगमगाहट से दूर बीहड़ अंधेरों में विकास के द्वार खोलने के लिए माधवराव जी ने सारा जीवन समर्पित कर दिया” दत्तोपंत ठेंगड़ीजी के ये शब्द उनके व्यक्तित्व को बिल्कुल सही परिभाषित करते हैं।

नई दिल्ली. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी ने आज संस्कार भारती के नवनिर्मित मुख्यालय ‘कला संकुल’ का लोकार्पण किया. लोकार्पण कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि भारतीय कलाएं मात्र मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि मनुष्य के अंदर के शिवत्व की अभिव्यक्ति हैं. पश्चिम ने कलाओं के माध्यम से महज मनोरंजन को चुना, इसलिए उनकी कला अधूरी है और वे सुख की तलाश में इधर-उधर भटक रहे हैं. सुख के लिए वे भारत की तरफ देख रहे हैं क्योंकि भारत उस मूल तक जाता है, जहां से सुख की भावना पैदा होती है. ऐसी समृद्ध कलाओं के माध्यम से समर्थ समाज का निर्माण करना हम सभी का लक्ष्य है.

कार्यक्रम की अध्यक्षता सुप्रसिद्ध कलाकार एवं राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय के अध्यक्ष परेश रावल ने ऑनलाइन माध्यम से की. संस्कार भारती के संरक्षक बाबा योगेंद्र जी भी उपस्थित थे. पहले इस कार्यक्रम का भव्य आयोजन विज्ञान भवन में होना तय था और इसे लेकर सभी तैयारियां भी पूरी हो गईं थीं. लेकिन, कोरोना महामारी की दूसरी लहर के बढ़ते प्रकोप के कारण कार्यक्रम ‘कला संकुल’ में ही प्रतीकात्मक रूप में आयोजित किया गया.

सरसंघचालक ने कहा कि भारतीय कला से मनुष्य की चित्तवृत्ति को अपार शांति का अनुभव होता है. वैसे भारतीय मूल से जीवन की जो भी वृत्तियाँ उभरी हैं, वे सारी बातें इसी की पूर्ति करती हैं. सत्य में शिवत्व को देखना है तो उसमें करुणा का पुट आवश्यक है. कला उस संवेदना की अभिव्यक्ति है. कला के इस प्रवाह को सुरक्षित रखना हम सबका राष्ट्रीय कर्तव्य है. उन्होंने आशा व्यक्त की कि ‘कला संकुल’ के माध्यम से सभी कलाओं के संवर्धन एवं संरक्षण हेतु ठोस प्रयास होंगे.

कार्यक्रम के प्रारम्भ में सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत और सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले ने दीप प्रज्ज्वलन कर और नारियल फोड़कर ‘कला संकुल’ का लोकार्पण किया. सरसंघचालक जी के हाथों के निशान लिए गए, जिन्हें संस्कार भारती ‘कला संकुल’ में संरक्षित करेगी. इस अवसर पर मालिनी अवस्थी, अनूप जलोटा, अनवर आली खान, सुगंधा शर्मा, वसीफुद्दीन डागर, पंडित धर्मनाथ मिश्र और पंडित रामकुमार मिश्र जैसे उच्चकोटि के कलाकारों ने अत्यंत मनमोहक ‘रागदेश’ प्रस्तुत किया.

इसके बाद संस्कार भारती की चार दशक की यात्रा और कला संगम की सम्पूर्ण कल्पना पर आधारित एक संक्षिप्त वृत्तचित्र प्रस्तुत किया गया. कार्यक्रम का यूट्यूब और फेसबुक के माध्यम से सीधा प्रसारण किया गया.

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पूर्व सरकार्यवाह भय्याजी जोशी, वर्तमान सह सरकार्यवाह डॉ. मनमोहन वैद्य, अरुण कुमार, अखिल भारतीय संपर्क प्रमुख श्री रामलाल, वरिष्ठ प्रचारक इंद्रेश कुमार, प्रज्ञा प्रवाह के राष्ट्रीय संयोजक जे. नंदकुमार, केन्द्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री प्रकाश जावडेकर, केन्द्रीय युवा एवं खेल राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) किरण रिजिजू, राज्यसभा सदस्य पद्मविभूषण डॉ. सोनल मानसिंह, लोकगायिका पद्मविभूषण तीजनबाई, सहित समाज जीवन के विभिन्न क्षेत्रों से अनेक विभूतियाँ उपस्थित थीं. कार्यक्रम में संस्कार भारती के महामंत्री अमीर चंद, संगठन मंत्री अभिजीत गोखले, उपाध्यक्ष हेमलता एस. मोहन, कार्यक्रम के संयोजक अनुपम भटनागर एवं सहसंयोजक भूपेंद्र कौशिक भी उपस्थित थे.

संस्कार भारती के संरक्षक पद्मश्री बाबा योगेंद्र जी ने कहा कि कलाकारों के माध्यम से समाज को जोड़ने और दिशा देने का काम ‘कला संकुल’ के माध्यम से होगा. “हमारा ध्येय है कि देश में शांति, आनन्द, परिश्रम और भक्ति का माहौल बने. हमारा यह गतिविधि केंद्र कला एवं कला साधकों को साथ लेकर राष्ट्र निर्माण के लिए नित्य निरत रहेगा.”

ऑनलाइन माध्यम से जुड़े संस्कार भारती के राष्ट्रीय अध्यक्ष वासुदेव कामत ने कहा कि स्थापना से आज तक संस्कार भारती का कोई केंद्रीय कार्यालय नहीं था. ऐसी स्थिति में कार्यकर्ता और कला साधक जहाँ कार्यरत थे, वही स्थान कार्यालय बन जाता था. “सौभाग्य से अनेक वर्ष के पश्चात देश की राजधानी में हमारे कार्यालय, ‘कला संकुल’ का लोकार्पण हो रहा है. कला संकुल के माध्यम से कला निर्मिति, कला विचार का प्रसार, संस्कार भारती का विचार-प्रसार पूरे देश में, आम जनमानस तक सरस्वती की तरह बहता रहेगा, ऐसा विश्वास है. हमारा लक्ष्य है कि कला के माध्यम से समाज के मन पर राष्ट्रीय संस्कार जाग्रत हों.”

वीडियो संदेश में कार्यक्रम के अध्यक्ष परेश रावल ने कहा – “कला-संस्कृति के क्षेत्र में वर्षों से कार्यरत महत्वपूर्ण उपक्रम संस्कार भारती के दिल्ली स्थित केंद्रीय कार्यालय के लोकार्पण के अवसर पर मेरा मन सुखद भावों से भर रहा है. जब केंद्र स्थिर होता है तो परिधि का विस्तार हो पाता है. संस्कार का प्रसार सदा ही संवाद माध्यमों के प्रयोग से किया जाता है और सारे संवाद माध्यम संस्कार प्रसार के माध्यम बन जाएं, यह संस्कार भारती का उद्देश्य है. मुझे विश्वास है कि केंद्रीय कार्यालय के कारण इस दिशा में केंद्रित प्रयास होंगे.”

नई दिल्ली के दीनदयाल उपाध्याय मार्ग पर स्थित संस्कार भारती का नवीन मुख्यालय ‘कला संकुल’ मूलतः कला-संस्कृति की गतिविधियों को समर्पित परिसर है. जिसमें कला, साहित्य, रंगमंच, सहित अनेक विधाओं का संयोजन एवं संवर्धन किया जाएगा. इस भवन में कला-संस्कृति की पुस्तकों से सुसज्जित एक समृद्ध पुस्तकालय, आर्ट गैलरी, सभागार, स्टूडियो एवं कांफ्रेंस रूम की सुविधा भी उपलब्ध है. आने वाले समय में यह कला-संस्कृति के बड़े केंद्र के रूप में विकसित होने वाला है.

૨૨.૦૩.૨૦૨૧ રાષ્ટ્રીય સ્વયંસેવક સંઘ દ્વારા આયોજિત પત્રકાર પરિષદમાં પ્રતિનિધિ સભા અંગે માહિતી આપતા ડો. ભરતભાઈ પટેલે (પ્રાંત સંઘચાલક, ગુજરાત પ્રાંત) કહ્યું કે આપ સૌ જાણો છો એમ રાષ્ટ્રીય સ્વયંસેવક સંઘ ની અખિલ ભારતીય પ્રતિનિધિ સભા દર વર્ષે મળે છે. જેમાં સંઘ અને વિવિધ ક્ષેત્ર ના વરિષ્ઠ કાર્યકર્તા ઓ  એકત્ર આવી ને ચિંતન ચર્ચા કરતા હોય છે. આ વર્ષે પણ આવી અખિલ ભારતીય પ્રતિનિધિ સભા બેંગાલુરુ ખાતે ૧૯-૨૦ માર્ચ ના રોજ યોજાઈ ગઈ. સામાન્ય રીતે પ્રતિનિધિ સભામાં ૧૫૦૦ જેટલા કાર્યકર્તાઓ અપેક્ષિત હોય છે પરંતુ આ વખતે કોવિડ ની વિષમ પરિસ્થિતિ હોવાને કારણે ૪૫૦ કાર્યકર્તાઓને પ્રત્યક્ષ બોલાવ્યા હતા અને બાકીના પોતાના પ્રાંત કેન્દ્ર થી ઓનલાઈન જોડાયા હતા.

 

દર ત્રીજુ વર્ષે ચુંટણી નું વર્ષ હોય છે અને  ચુંટણી ના વર્ષ ની પ્રતિનિધિ સભા નાગપુર માં જ મળતી હોય છે પરંતુ કોવિડ ની વિષમ પરિસ્થિતિ ને કારણે બેન્ગ્લુરું માં આ સભા યોજાઈ સંઘ ના ઈતિહાસ માં આવું પહેલી વાર બન્યું છે. એ રીતે પણ આ બેઠક વિશિષ્ઠ રહી.

બેઠક નો પ્રારંભ દર વર્ષે  વર્ષ દરમ્યાન દિવંગત થયેલ સમાજ જીવન ના આગેવાનો અને અલગ અલગ ક્ષેત્રે દેશ ને ગૌરવ અપાવ્યું હોય એવા દિવંગત વ્યક્તિઓ ને શ્રદ્ધાંજલિ આપી ને થાય છે .આ વર્ષે પણ સંઘ ના વરિષ્ઠ કાર્યકર્તા અને વિચારક જેમનો સંઘ પ્રવેશ પુ. ડોક્ટર સાહેબ ની ઉપસ્થિતિ માં થયો હતો એવા સ્વ. મા.ગો. વૈધ, આપણા પૂર્વ રાષ્ટ્રપતિ સ્વ. પ્રણવ મુખર્જી સહિત અનેકદિવંગત આત્માઓ ને શ્રધાંજલિ આપી જેમાં ગુજરાત માં થી બે પૂર્વ મુખ્યમંત્રીઓ સ્વ. કેશુભાઈ પટેલ અને સ્વ. માધવસિંહ સોલંકી સહિત ૭ જણને શ્રધાંજલિ આપવામાં આવી.

ગત વર્ષ નું સંઘ કાર્ય આમ તો બહુ વ્યસ્ત અને વ્યાપક રહ્યું કોવીડ ની સ્થિતિને પહોંચી વળવા તંત્ર સાથે સહયોગ કરી ને નીતિ નિયમો નું પાલન કરી ને સ્વયંસેવકો સમાજ સેવા માં આખું વર્ષ લાગેલા રહ્યા. આ વિષમ સ્થિતિમાં કોવીડ ની ગાઈડ લાઈન પ્રમાણે મેદાનમાં શાખાઓ નહોતી લગતી પરતું  અત્યારે ગત વર્ષની સરખામણીમાં ૯૦% સ્થાનો પર શાખાઓ શરુ થઇ ગઈ છે.

વર્તમાન માં દેશભરમાં 60,૭૭૭ સ્થાન પર સંઘનું પ્રત્યક્ષ કાર્ય છે.

ગુજરાતમાં પણ ૧૩૨૧ સ્થાન પર સંઘનું પ્રત્યક્ષ કાર્ય છે.  

તદઉપરાંત પ્રતિનિધિ સભા માં બે ઠરાવ સર્વાનુમતે પસાર થયા

ઠરાવ ક્રમાંક ૧. શ્રી રામ જન્મભૂમી પર મંદિર નું નિર્માણ ભારત ની અંતર્નિહિત શક્તિ નું પ્રગટીકરણ

ઠરાવ ક્રમાંક ૨. કોરોના મહામારી ની સામે ઊભું એકજુટ ભારત

આ બન્ને ઠરાવો ની નકલ આપ સૌના માટે ઉપલબ્ધ છે.

અગાઉ કહ્યું એમ આ વર્ષ ચુંટણી નું વર્ષ હોવાથી સંઘ ના સર કાર્યવાહ મા. શ્રી સુરેશજી(ભૈયાજી) જોશી નો ગત ત્રણ વર્ષ નો કાર્યકાળ પૂરો થયો હોવાથી સંઘ ના બંધારણ પ્રમાણે ચુંટણી યોજાઈ જેમાં સંઘ ના સહ સરકાર્યવાહ એવા  મા. દત્તાત્રેય હોસ્બોલે ની સંઘ ના સર કાર્યવાહ તરીકે સર્વાનુમતે વરણી થઇ. મા. સુરેશજી  જોશી આ પદ પર ૧૨ વર્ષ સુધી કાર્યરત રહ્યા.

ગુજરાતમાં પણ શ્રી શૈલેષભાઈ પટેલની પ્રાંત કાર્યવાહ તરીકે અને શ્રી નીમેશભાઈ પટેલની સહ પ્રાંત પ્રચારક તરીકે નિયુક્તિ થઇ છે. પૂર્વ પ્રાંત કાર્યવાહ શ્રી યશવંતભાઈની પશ્ચિમ ક્ષેત્ર કાર્યકારીણી સદસ્ય તરીકે નિયુક્તિ થઇ છે.

  • સ્વ. સંઘના નવા સરકાર્યવાહ તરીકે શ્રી દત્તાત્રેય હોસબલે નિર્વાચિત થયા છે.
  • પ્રતિનિધિ સભાની બેઠકના અંતિમ દિવસે ચૂંટણી પ્રક્રિયામાં તેમની પસંદગી કરાઇ
  • શ્રી દત્તાત્રેય હોસબલે આગામી ત્રણ વર્ષ સુધી સરકાર્યવાહ તરીકેની જવાબદારી સંભાળશે.

બેંગ્લુરુ: અખિલ ભારતીય પ્રતિનિધિ સભામાં રાષ્ટ્રીય સ્વયંસેવક સંઘના નવા સરકાર્યવાહ તરીકે દત્તાત્રેય હોસબલેનું નિર્વાચન કરવામાં આવ્યું છે. શ્રી દત્તાજી હોસબલે આગામી ત્રણ વર્ષ સુધી સરકાર્યવાહ તરીકેની જવાબદારી સંભાળશે. તેઓ હાલના સંઘના સરકાર્યવાહ શ્રી ભય્યાજી જોશીનું સ્થાન ગ્રહણ કરશે. તેઓ વર્ષ 2009થી સંઘના સહ સરકાર્યવાહ હતા. સંઘમાં પ્રત્યેક ત્રણ વર્ષે ચૂંટણી પ્રક્રિયા મારફતે જિલ્લા સંઘચાલક, વિભાગ સંઘચાલક, પ્રાંત સંઘચાલક, ક્ષેત્ર સંઘચાલકની સાથોસાથ સરકાર્યવાહની પસંદગી કરવામાં આવે છે.

શ્રી દત્તાત્રેય હોસબલે શિવમોંગા, કર્ણાટકના રહેવાસી છે. તેમનો જન્મ 1 ડિસેમ્બર, 1954માં થયો છે. વર્ષ 1968માં તેઓ કર્ણાટકના શિવમોંગા જીલ્લામાં સંઘના સંપર્કમાં આવ્યા બાદ તેઓ સ્વયંસેવક બન્યા હતા. વર્ષ 1978માં અખિલ ભારતીય વિદ્યાર્થી પરિષદના સભ્ય બન્યા અને વર્ષ 1990માં પ્રચારક બન્યા હતા. તેઓએ અંગ્રેજી વિષય સાથે MAની પદવી હાંસલ કરી છે. વિદ્યાર્થી પરિષદમાં ક્ષેત્રીય તેમજ રાષ્ટ્રીય મહામંત્રી ઉપરાંત અખિલ ભારતીય સંગઠન મંત્રી તરીકેની જવાબદારી પણ તેઓ સંભાળી ચૂક્યા છે. તેઓ સંઘના અખિલ ભારતીય બૌદ્વિક પ્રમુખ પણ રહ્યા છે. ત્યારબાદ સહ સરકાર્યવાહ તરીકેનો કાર્યભાર ગ્રહણ કર્યો છે.

પ્રતિનિધિ સભાના પ્રારંભમાં ગત વર્ષે દિવંગત થયેલા મહાનુભાવો ને શ્રધાંજલિ આપવામાં આવી. જેમાં ગુજરાતના શ્રી નગીનદાસ સંઘવી, પૂ. પુરષોત્તમ પ્રિય દાસજી સ્વામી( મણીનગર સ્વામીનારાયણ સંસ્થાન), પૂ. જસોમતીનંદનજી (ઇસ્કોન), શ્રી કેશુભાઈ પટેલ, શ્રી માધવસિંહ સોલંકી, શ્રી જીવણભાઈ પટેલ (કિસાન સંઘ), શ્રી મહેશ કનોડિયા, શ્રી નરેશ કનોડિયાનો સમાવેશ થાય છે.

પ્રતિનિધિ સભામાં બે ઠરાવ પસાર કરવામાં આવ્યા જેમાં

પહેલો ઠરાવ શ્રીરામ જન્મભૂમિ પર મંદિરનું નિર્માણ ભારતની અંતર્નિહિત શક્તિનું પ્રકટીકરણ છે.

બીજો ઠરાવ કોવિદ મહામારીની સામે એકજુટ ઉભું ભારત વિષય પર કરવામાં આવ્યા હતા.

ગુજરાતના સંદર્ભમાં

ગુજરાત પ્રાંત કાર્યવાહ તરીકે શ્રી શૈલેષભાઇ પટેલ રહેશે અને શ્રી યશવંતભાઈ જે પ્રાંત કાર્યવાહ હતા તેમની નિમણુક પશ્ચિમક્ષેત્ર કાર્યકારીણી સદસ્ય તરીકે કરવામાં આવેલ છે.

बेंगलुरु. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख अरुण कुमार ने कहा कि समाज में कार्यरत सामाजिक, धार्मिक संगठनों को साथ लेकर समाज व्यापी, राष्ट्र व्यापी सामाजिक शक्ति खड़ी करना ही संघ का लक्ष्य है. संघ समाज की सामूहिक शक्ति के जागरण का कार्य कर रहा है. देश समाज के लिए कार्य करने वाले समान विचार के समस्त लोगों, संगठनों को साथ जोड़ना इस दिशा में भी संघ प्रयास कर रहा है.

वे बेंगलुरु में 19, 20 मार्च को होने वाली अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा (जनसेवा विद्या केंद्र, बेंगलुरु) के संबंध में जानकारी देने के लिए आयोजित प्रेस वार्ता में पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे.

उन्होंने कहा कि कोरोना काल के एक साल में भले ही संघ की प्रतिदिन की गतिविधियां कम थीं, लेकिन स्वयंसेवकों, कार्यकर्ताओं का समाज में संपर्क बहुत बड़ा था. इस काल में अनेक सामाजिक- धार्मिक संगठन, समाज के लिए कार्य करने वाले लोग हमारे निकट आए, हमसे जुड़े, हम अनेक नए स्थानों पर पहुंचे. इसे देखते हुए ऐसी योजना करने वाले हैं कि सभी को साथ लेकर समाज जागरूकता के लिए क्या-क्या कर सकते हैं, इसे लेकर भी बैठक में चर्चा होगी.

हर तीन साल में हम कार्य की समीक्षा करते हैं. पिछले तीन वर्षों संघ कार्य के विस्तार, ग्राम विकास, पर्यावरण संरक्षण (विशेषकर जल संरक्षण, पौधारोपण, प्लास्टिक का कम से कम उपयोग), सामाजिक परिवर्तन को लेकर योजना तय की थी. प्रतिनिधि सभा में तीन साल में किये कार्य को लेकर महत्वपूर्ण चर्चा होगी कि हम कहां तक पहुंच पाए. सामाजिक परिवर्तन (सोशल ट्रांसफ़ॉर्मेशन) के कार्य में कितना आगे बढ़ सके. इसके साथ ही आने वाले तीन सालों की योजना पर भी चर्चा होगी, हमारी दिशा क्या होनी चाहिए, इस पर भी बैठक में चर्चा होगी.

उन्होंने कहा कि संघ ने अपने कार्य की दृष्टि से 60 हजार मंडल, 60 हजार बस्ती बनाई हैं. इनमें से लगभग 65 हजार स्थानों पर संघ की पहुंच है. इन स्थानों पर प्रत्येक परिवार तक संघ की पहुंच हो, कार्य विस्तार की दृष्टि से ऐसा संघ का प्रयास है.

उन्होंने कहा कि बेंगलुरू में 19 और 20 मार्च को प्रतिनिधि सभा होगी. आज शाम से कल शाम तक कार्यकारी मंडल की बैठक रहेगी. अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा संघ की निर्णय लेने वाली सर्वोच्च ईकाई है. निर्णय प्रतिनिधि सभा में ही लिए जाते हैं.

पिछले वर्ष भी प्रतिनिधि सभा बेंगलुरु में होनी थी, लेकिन परिस्थितियां बदलीं. कोरोना के कारण स्थगित करने का निर्णय लिया गया. इस बार निश्चित हुआ कि बेंगलुरु में ही प्रतिनिधि सभा की जाए.

कोरोना के कारण संघ का भी नियमित काम प्रभावित रहा. लेकिन संघ सरकारी नियम व्यवस्था का पालन करता है और इसीलिए संघ ने अपनी महत्वपूर्ण प्रांत प्रचारक बैठक स्थगित की, इसी प्रकार कार्यकारी मंडल की बैठक भी एक स्थान के बजाय 11 स्थानों पर की.

प्रतिनिधि सभा में 1500 लोग अपेक्षित रहते हैं. लेकिन कोरोना का संकट अभी समाप्त नहीं हुआ है, इसलिए पहले से ही ध्यान में रखकर तय किया और न्यूनतम आवश्यकता को देखते हुए 450 लोगों को बुलाया. साथ ही तीन दिन के स्थान पर दो दिन की बैठक रखी. उन्होंने कहा कि संघ कार्य की दृष्टि से 44 प्रांत बनाए हैं, इन प्रांतों के निर्वाचित प्रतिनिधि व अन्य लगभग 1000 लोग 44 स्थानों से ऑनलाइल माध्यम से बैठक में जुड़ेंगे.

उन्होंने कहा कि 19 मार्च सुबह बैठक शुरू होगी, पहला सत्र 8.30 से प्रारंभ होगा. 9 बजे प्रेस वार्ता रहेगी. सह सरकार्यवाह डॉ. मनमोहन वैद्य जी प्रेस वार्ता में रहेंगे. वार्षिक प्रतिवेदन के साथ ही प्रस्तावों के संबंध में जानकारी देंगे. हर तीन साल में सरकार्यवाह का चुनाव होता है तो 20 मार्च को दूसरे सत्र में सरकार्यवाह के चुनाव की प्रक्रिया पूरी होगी.

कर्णावती, 20 फरवरी

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सहसरकार्यवाह डॉ. मनमोहन वैद्य ने कहा कि, हमारे देश में सेक्युलर शब्द बहुत प्रचलित है। लेकिन भारतीय सभ्यता अपने आप में सभी धर्मो को समान रूप से सम्मान देती है। नतीजतन रोम के थियोक्रॅटिक स्टेट (धर्मसत्ता) के कार्यकाल मे उत्पन्न हुआ यह शब्द भारत में प्रासंगिक नही है।

गुजरात के अहमदाबाद में स्थित माधव स्मृति न्यास द्वारा “धर्मचक्र प्रवर्तनाय” विषय पर आयोजित दो दिवसीय व्याखान माला के समापन कार्यक्रम में मार्गदर्शन करते हुए डॉ. वैद्य ने धर्म और सेक्युलर इन दो शब्दो पर अपने विचार रखे। सहसरकार्यवाह ने कहा कि, सूरत के के टी शाह ने संसद एक बिल लाया था कि, भारत को “सेक्युलर सोशॅलिस्ट रिपब्लिक” कहा जाए। लेकिन उस समय के विद्वानो ने शाह का यह प्रस्ताव नामंजूर किया था। तत्कालिन विद्वानो का यह मानना था कि, भारतीय सभ्यता में इस शब्द कि जरूरत नही है। क्यो कि, भारतीय समाज और सभ्यता सभी को स्वीकार करती है। सेक्युलर शब्द कि उत्पत्ती पर रौशनी डालते हुए डॉ. वैद्य ने बताया कि, कबिलो में बटा युरोपियन समाज सबसे पहले तिसरी शताब्दी में रोमन साम्राज्य के विस्तार के साथ एक छत के नीचे आया। इसी के साथ ईसाइ धर्म का भी विस्तार हुआ  जेरूशलम से चलने वाली पोप कि सत्ता खिसक कर वैटिकन में चली गई। वही राजा के आश्रय कि वजह से बिशप का महत्त्व बढ गया था। छटी शताब्दी में रोमन साम्राज्य समाप्त होने के बाद समाज को जोडे रखने के लिए सत्ता पोप के हाथो में आई। डॉ. मनमोहन वैद्य ने कहा कि, पोप द्वारा चलाए जाने वाले इस राज्य को थियोक्रटिक स्टेट कहा जाता था। यह राज्य लगभग एक हजार वर्षो तक रहा। सहसरकार्यवाह ने बताया कि, तत्कालिन रोमन समाज के लोग भौतिक चीजों को धर्म सत्ता से दूर रखना चाहते थे। नतिजतन धर्म से जुडी व्यवस्था के लिए रिलिजीन और अन्य चीजों के लिए सेक्युलर शब्द का इस्तेमाल किया जाने लगा। सेक्युलर शब्द पर अधिक रौशनी डालते हुए डॉ. मनमोहन वैद्य ने कहा कि, दुनिया में कई ऐसे शब्द होते है जिनकी अवधारणा के पिछे स्थानिय सभ्यता और भूगोल अंतर्निहीत होता है। उन्होंने बताया कि, अंग्रेजी भाषा में दुध, दही, छाछ, मख्खन के लिए पर्यायी शब्द है। लेकिन मख्खन से बनने वाले घी के लिए कोई शब्द नही है। नतीजतन अंग्रेजी भाषा में उसे घी ही कहा जाता है। केवल भारत में ही मख्खन से घी निकाल कर उपयोग किया जाता है। इसलिए यह शब्द भारत और यहा कि भाषाओ में ही उपलब्ध है। ठीक उसी तरह सेक्युलर यह विदेशी अवधारणा से उत्पन्न हुआ शब्द है और भारत मे प्रासंगिक नही है।

सेक्युलर शब्द के भारतीय इतिहास कि जानकारी साझा करते हुए मनमोहनजी  ने बताया कि, भारत में आपातकाल के दौरान 1976 में बिना चर्चा के भारतीय संविधान में 42 वा संशोधन किया गया। इस संशोधन के तहत संविधान के प्रस्तावना में बेवजह सेक्युलर शब्द जोडा गया। संविधान के जानकार कहते है कि, संविधान के प्रस्तावना में कोई बदलाव नही हो सकता। इसके बावजूद संविधान में सेक्युलर शब्द अनावश्यक रूप से जोडा गया। मनमोहनजी ने कहा कि, सेक्युलर शब्द को भारत मे जिस तरह से परिभाषीत किया गया वह अपने आप में विचित्र है। हिंदु धर्म और आस्था कि बात करना हमारे देश में सांप्रदायिक माना जाता है। अन्य धर्मो के लोगो ने मजार पर चादर चढाना सेक्युलर है। लेकिन मंदिर में घंटी बजाना सांप्रदायिकता कहलाता है। भारतीय सेक्युलॅरिझम के तहत आप ओवैसी के साथ मंच साझा कर सकते है। लेकिन, यदी योगी आदित्यनाथ के साथ मंच पर बैठे तो आप को सांप्रदायिक कहा जा सकता है। दुनिया के किसी भी मुस्लीम देश में हजयात्रा के लिए सबसिडी नही दी जाती। लेकिन सेक्युलर कहलाने वाले भारत में हज को सबसीडी मिलती है। प्रधानमंत्री रहते हुए डॉ. मनमोहन सिंग ने कहा था कि, भारत के संसाधनो पर पहला हक अल्पसख्याक समुदाय का है। मनमोहनजी ने कहा कि, प्रधानमंत्री का यह वाक्य अपने-आप मे सांप्रदायिक था। लेकिन सेक्युलर देश में किसी ने उस वाक्य पर आपत्ती दर्ज नही कराई।

धर्म कि परिभाषा पर अपने विचार रखते हुए उन्होंने कहा कि, “धारणात् धर्म इत्याहुः धर्मो धारयति प्रजाः। यः स्यात् धारणसंयुक्तः स धर्म इति निश्चयः।।” ऐसा संस्कृत भाषा में सुभाषित है। इसका अर्थ होता है कि, ‘जो धारण करता है, एकत्र करता है, उसे ”धर्म” कहते हैं। उपासना और अध्यात्म धर्म से जुडा होता है। नतीजतन कई लोग उपासना पद्धती को धर्म मान लेते है। लेकिन धर्म कि परिभाषा इतनी सिमीत नही है। हमारे देश कि संसद में “धर्मचक्र प्रवर्तनाय” लिखा हुआ है। व्यक्ती से समाज को जोडने का नाम धर्म है। हमारे राष्ट्रध्वज में जो चक्र है उसे लोग अशोक चक्र कहते है। वास्तव में यह धर्मचक्र है जिसे सम्राट अशोक ने स्विकारा था। समाज में दुसरो के प्रति योगदान देना मै से हम तक कि यात्रा का नाम धर्म है। उन्होंने आवाहन किया कि, धर्म के इस विस्तारित अर्थ को ध्यान में रख कर हमें धर्मचक्र को गतिमान रखने में योगदान देना चाहिए।

ત્રિરંગાના રંગો ત્યાગ, કર્મ, પ્રકાશ, પવિત્રતા, સમૃદ્ધિના પ્રતીક છે

આપણા સંવિધાનમાં નાગરિક અધિકારની સાથે નાગરીક કર્તવ્યની પણ વાત છે

બધાને સ્વીકારવું, સંયમ પૂર્વક જીવન જીવવું અને સતત કર્મ કરતા રહી સર્વત્ર   મંગલ કરવું એ આપણા દેશનું પ્રયોજન છે.

રા.સ્વ.સંઘના માનનીય સરસંઘચાલક શ્રી મોહનજી ભાગવતે સંઘ કાર્યાલય કર્ણાવતી ખાતે ઘ્વજ વંદન કરી પ્રજાસત્તાક દિનની ઉજવણી કરી હતી. આ પ્રસંગે તેમણે પોતાના ઉદબોધનમાં કહ્યું કે,

         આપણે જન ગણ મન ગાઈએ છીએ ત્યારે ધ્યાનમાં આવે છે કે ભારત ભાગ્ય વિધાતાને નમન કરતાં આપણે આપણા દેશનું સ્મરણ કરીએ છીએ. દેશની ભૂમિ, તેની સીમા, પહાડો, નદીઓ, જન, જંગલ, પ્રાણીઓ,પુત્રો, પર્યાવરણ, ભૂમિ આ બધા આપણી આંખો સામે આવે છે. ભારતીય લોકો આસ્તિક બુદ્ધિના લોકો છે. પોતાની શ્રદ્ધાને સુરક્ષિત રાખી દેશ માટે પ્રાર્થના કરીએ છીએ, તે પ્રાર્થનામાં ભારત માતાનાં સ્વરૂપનું વૈચારિક દ્રષ્ટિથી દર્શન કરી અને ભારતમાતાનાં પૂજન સમયે તેમનું અખંડ સ્વરૂપનું ચિંતન કરીએ છીએ. આપણે કહીએ છીએ “તવ શુભ નામે જાગે” જેમાં જાગૃતિનું પ્રત્યક્ષ સ્વરૂપ સંવિધાન સમ્મત ત્રિરંગો ઘ્વજ છે.

         ત્રિરંગાના રંગો ત્યાગ, કર્મ, પ્રકાશ, પવિત્રતા, સમૃદ્ધિના પ્રતીક છે. બધાને સ્વીકારવું, સંયમ પૂર્વક જીવન જીવવું અને સતત કર્મ કરતા રહી સર્વત્ર મંગલ કરવું એ આપણા દેશનું પ્રયોજન છે. ભાષણથી નહિ પોતાના જીવનથી લોકોનું માર્ગદર્શન કરવું જોઈએ. મનની સમૃદ્ધિની આરાધના કરવા વાળા શુદ્ધ ચારિત્ર્યવાળા લોકો જ્યારે સતત પ્રયાસ કરશે ત્યારે શુભ નામથી ભારત જાગશે.

         આ આપણું ગણતંત્ર છે જેને ચલાવનાર આપણે જ છીએ. આપણા સંવિધાનમાં નાગરિક અધિકારની સાથે નાગરીક કર્તવ્યની પણ વાત છે. સંવિધાનને વાંચતા દેશને કઈ દિશામાં આગળ લઈ જવો તે ખબર પડે છે એટલે અવશ્ય વાંચવું જોઈએ..    દર વર્ષે ઘ્વજવંદન થાય પણ એની પાછળનો જે ભાવ છે, ઉદેશ્ય છે એ જળવાવો જોઈએ અને કામ કરવું જોઈએ તે જ આજના દિવસનો પાથેય છે…

तिरंगे के रंग त्याग, कर्म, प्रकाश, पवित्रता, समृद्धि के प्रतीक है।

हमारे संविधान में नागरिक अधिकार के साथ नागरिक दायित्व की भी बात कही है।

* सब को अपनाना, त्याग और संयम पूर्वक जीवन जीना और सतत कर्म करते हुए सर्वत्र मंगल करना यही अपने देश का प्रयोजन है।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के माननीय सरसंघचालक श्री मोहन जी भागवत ने कर्णावती (गुजरात) में रा.स्व.संघ कार्यालय पर ध्वजारोहण किया. इस अवसर पर संबोधन करते हुए उन्होंने कहाँ कि हम जब “जन गण मन” गाते हैं तब ध्यान में आता है कि भारत भाग्य विधाता को नमन करते समय हमने देश का स्मरण किया। तब हमारी आँखों के सामने देश की भूमि, उसकी सीमाएं, पहाड़, नदियां, जन, जंगल, पशु, पर्यावरण तथा उसके पुत्र यह सभी आते हैं।

भारतीय लोग आस्तिक बुद्धि के लोग हैं। अपनी श्रद्धा को सुरक्षित रखते हुए उस श्रद्धा के साथ अपने देश के लिए प्रार्थना करते हैं, उस प्रार्थना में भारत माता के स्वरूप का वैचारिक दृष्टि से दर्शन करके और भारत माता के पूजन के समय उनके अखंड स्वरूप का चिंतन करते हैं। हम कहते हैं “तव शुभ नामे जागे” जिसमें जागृति का प्रत्यक्ष स्वरूप संविधान सम्मत तिरंगा ध्वज है

तिरंगे के रंग त्याग, कर्म, प्रकाश, पवित्रता, समृद्धि के प्रतीक है। सब को अपनाना, त्याग संयम पूर्वक जीवन जीना और सतत कर्म करते हुए सर्वत्र मंगल करना यही अपने देश का प्रयोजन है। हमें दुनियां को जो बताना है वह भाषण से नहीं बताना है खुद के जीवन से लोगों का मार्गदर्शन करना चाहिए। मन की समृद्धि की आराधना करने वाले शुद्ध चरित्र वाले लोग जब सतत प्रयास करेंगे तब शुभ नाम से भारत जागेगा।

यह अपना गणतंत्र है, जिसे चलाने वाले हम ही हैं। हमारे संविधान में नागरिक अधिकार के साथ नागरिक दायित्व की भी बात कही है। संविधान पढ़ते ही देश को किस दिशा में आगे ले जाना है वह पता चलता है, इसीलिए संविधान को प्रत्येक व्यक्ति को अवश्य पढ़ना चाहिए।

हर साल ध्वज वंदन होता है, लेकिन उसके पीछे का भाव, उद्देश्य बना रहना चाहिए। और कार्य करते रहना चाहिए, यही आज के दिन का पाथेय है