जगदीश सिंह चीता ने मां को दफनाने की बजाय किया दाह संस्कार, अपनी परंपराओं की ओऱ वापिस लौटे

जयपुर. हिन्दू सम्राट पृथ्वीराज चौहान के चीता मेहरात समाज में इतिहास ने अपने आपको दोहराया. चीता समाज में सैकड़ों वर्षों के बाद हिन्दू धर्म की मान्यताओं के अनुसार दाह संस्कार हुआ. सैकड़ों वर्षों से इस समाज में मिट्टी दाग यानि दफनाने की परंपरा चली आ रही थी. लेकिन अजयसर के आगे गांव मसीनिया के रहने वाले जगदीश सिंह चीता ने रिश्तेदारों और अन्य लोगों के भारी दबाव के बावजूद अपने आपको हिन्दू कहते हुए मां का दाह संस्कार किया. अंतिम संस्कार में सैकड़ों लोग शामिल हुए.

दाह संस्कार के बाद जगदीश सिंह चीता ने कहा कि कालांतर में मुस्लिम शासकों के अत्याचार के चलते हमारे चौहान वंशीय कुछ बुजुर्गों ने इस्लाम धर्म की तीन बातें स्वीकार कर ली थी. उन्हीं तीन बातों को आधार बनाकर हमारी सारी जाति को मुस्लिम बनाने का षड्यंत्र रचा जा रहा है. जबकि हम चौहान वंश की गौरवशाली परंपरा से हैं.

हम क्षत्रिय हिन्दू हैं. हिन्दू संस्कारों में मृत्यु के बाद दाह संस्कार ही होता है. इसलिए मैंने सारी मुस्लिम परंपराओं को तिलांजलि देते हुए अपनी मां का अंतिम संस्कार किया है. मुझे गर्व है कि मैं हिन्दू हूँ.

हिन्दू समाज से अपील

जगदीश सिंह चीता ने हिन्दू समाज से अपील की है कि चीता और मेहरात समाज के लोग इस्लामिक संगठनों के जाल में फंसते जा रहे हैं. लाखों की संख्या में ऐसे चीता मेहरात है जो अपने हिन्दू धर्म का पालन करना चाहते हैं. इन सभी लोगों को हिन्दू समाज मुस्लिम समझ कर दूरी न बनाएं. इस समाज के लोगों को हिन्दू समाज के सभी वर्गों के सहयोग की आवश्यकता है.

विहिप ने किया स्वागत

विश्व हिन्दू परिषद के केंद्रीय मंत्री उमा शंकर और सह केंदीय मंत्री आनंद अरोड़ा ने जगदीश सिंह चीता के इस कदम का स्वागत किया है. विहिप पदाधिकारयों ने कहा कि चौहान वंश के चीता और मेहरात समाज के अन्य लोगों को जगदीश सिंह चीता से प्रेरणा लेनी चाहिए. हिन्दू समाज सदैव उनके साथ तन मन धन सहित हर तरह से है.

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