युवाओं को प्रेरणा देगी राष्ट्र गौरव, कर्तव्य बोध जागरण प्रदर्शनी : महंत चांदनाथ

रोहतक  (विसंकें). राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के तरुणोदय 2015 शिविर के दृष्टिगत गुरुवार को शिविर स्थल बाबा मस्तनाथ विवि के इंजीनियरिंग परिसर में राष्ट्र गौरव एवं कर्तव्य बोध जागरण प्रदर्शनी का उद्घाटन किया गया. दीप प्रज्वलन और नारियल फोडक़र प्रदर्शनी का उद्घाटन करने के बाद अलवर के सांसद एवं बाबा मस्तनाथ मठ के महंत चांदनाथ ने कहा कि प्रदर्शनी युवाओं को प्रेरणा देने के साथ ही नई दिशा दिखाने का काम करेगी. यह प्रदर्शनी वाकई बहुत मेहनत के साथ तैयार की गई है. इसके लिए आयोजकों को साधुवाद. महंत ने आधे घंटे से अधिक समय तक प्रदर्शनी का अवलोकन भी किया. प्रदर्शनी में रखे गए वेदों को देखने के बाद महंत जी ने कहा कि यह तो हमारी जड़ें हैं. प्रदर्शनी संघ के दर्शन के साथ ही समरसता का संदेश देने वाली है.

प्रदर्शनी की झलक……

26 जनवरी की परेड में शामिल हुए थे स्वयंसेवक

वर्ष 1963 में 26 जनवरी की परेड में तत्कालीन प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू के बुलावे पर संघ के स्वयंसेवकों की एक टोली ने राजपथ पर गणतंत्र दिवस की परेड में भाग लिया था. प्रदर्शनी में परेड में शामिल हुए स्वयंसेवकों का चित्र भी प्रदर्शित किया गया है. चित्र को देखने के बाद दर्शकों ने कहा कि यह साबित करता है कि संघ देशहित में हमेशा अग्रसर रहता है.

घर वापसी नई बात नहीं

जिस घर वापसी अभियान पर आज देश में तथाकथित धर्मनिरपेक्ष लोग हंगामा कर रहे हैं, यह क्रम आज से नहीं बल्कि मुगलकाल से चल रहा है. अंग्रेजों के शासन के दौरान पेशवाओं ने घर वापसी कार्यक्रम को चलाए रखा. आर्य समाज ने व्यापक पैमाने पर घर वापसी (शुद्धिकरण) कार्यक्रम चलाया और किसी भी कारण से अन्य मत में चले गए लोगों का शुद्धिकरण करके अपने मत में वापस लाया गया. पठानकोट के सम्राट जब दबाव के कारण इस्लाम धर्म स्वीकार कर रहे थे तो उनके पुरोहित ने उन्हें समझाया, जिस पर सम्राट ने धर्म परिवर्तन का मन बदला. तमिलनाडु में लगभग एक हजार वर्ष पूर्व रामानुजाचार्य ने शुद्धिकरण के लिए बहुत कार्य किया. महाराष्ट्र में समाज सुधारक ज्योतिबा फुले ने समाज की समरसता के लिए अपना जीवन लगा दिया. वर्ष 1739 में पुर्तगालियों ने वसई किले पर हमला कर बहुत से लोगों को ईसाई बनाया. पेशवाओं ने शुद्धिकरण अभियान चलाकर लोगों को पुनर्स्थापित  कराया. मराठों ने शुद्धिकरण के लिए एक व्यवस्था बनाई थी. धर्मसभा में गोत्र और वतन की जानकारी रखी जाती थी. पंडित मदन मोहन मालवीय की अध्यक्षता में 19 अगस्त 1923 को हिंदू महासभा का अधिवेशन हुआ. इस अधिवेशन में तीन दिन की बहस के बाद रूढि़वादी पुराहितों द्वारा शुद्धिकरण का प्रस्ताव रखा गया और प्रस्ताव पास हुआ.

संघ बन रहा समरस समाज की मिसाल

प्रदर्शनी में समरसता विषय पर लगाई प्रदर्शनी युवाओं को जाति मुक्त समाज के प्रति प्रेरित करने का काम करेगी. संघ में समरस समाज की स्थापना के लिए शुरू से ही काम किया जा रहा है. संघ में कभी किसी कार्यकर्ता की जाति नहीं पूछी जाती. प्रदर्शनी में स्वामी विवेकानंद से लेकर अन्य महापुरुषों के समरस समाज के निर्माण संबंधी बातें सच में प्रेरणा देने वाली हैं.

सिक्ख गुरुओं का बलिदान करेगा युवाओं को प्रेरित

प्रदर्शनी में दर्शाया सिक्खों का बलिदान का इतिहास झकझोर देने वाला है.  गुरुओं की स्वस्थ समाज के निर्माण की सीख के साथ ही पूरा परिवार बलिदान कर देने वाले चित्र प्रेरणा देने वाले हैं. इस प्रदर्शनी में दर्शाया गया है कि कैसे गुरु गोबिंद सिंह ने ईमानदारी की सीख दी और पूरे परिवार का बलिदान देकर सभी के समक्ष देशहित सर्वोपरि का उदाहरण प्रस्तुत किया. शिविर में आने वाले युवा प्रदर्शनी से समाज और देशहित में काम करने की प्रेरणा लेकर जाएंगे.

प्रदर्शनी के उद्घाटन के अवसर पर महंत चांदनाथ के साथ संघ के उत्तर क्षेत्र के कार्यवाह सीताराम व्यास, हरियाणा सह प्रांत संघचालक पवन जिंदल जी, प्रांत कार्यवाह देवप्रकाश भारद्वाज, प्रांत प्रचारक सुधीर कुमार, सह प्रांत कार्यवाह प्रताप, बाबा मस्तनाथ विवि के कुलपति डॉ. मारकंडेय आहुजा आदि प्रमुख रूप से उपस्थित थे.

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