विश्वकल्याण की कल्पना अपनी ग्राम्य संस्कृति के द्वारा ही संभव है – हसमुखभाई पटेल

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, गुजरात प्रांत द्वारा दक्षिण गुजरात के भरूच मे ग्राम विकास कार्यकर्त्ता संमेलन का आयोजन किया गया. 6 मार्च, रविवार को आयोजित इस संमेलन मे 13 जिलो के 57 तहसील से 184 स्थानों से 519 कार्यकर्त्ता उपस्थित रहे.

इस अवसर पर श्री हसमुखभाई पटेल (पश्चिम क्षेत्र व्यवस्था प्रमुख, रा.स्व.संघ) ने भूमि, जल, वन, जीव, गो, उर्जा और जनसंपदा को हो रही क्षति की ओर ध्यान आकर्षित करते इनके संरक्षण और संवर्धन के प्रयत्नशील रहने की आवश्यकता पर बल दिया. उन्होंने कहाँ कि मुस्लिम आक्रांता आये तबतक हमारा ग्राम्य जीवन अखंड था. अंग्रेजो के आगमन के बाद उनकी कुटिलनीति के कारण शहरीकरण बढ़ा और ग्राम्य जीवन टूटता गया. इन्ही कारणों से हमें ग्रामविकास विषय पर सोचना पड़ता है. हमारी संस्कृति विश्वकल्याण की कल्पना करती है जो अपनी ग्राम्य संस्कृति के द्वारा ही संभव है.

श्री उपेन्द्रजी कुलकर्णी (पश्चिम क्षेत्र सेवा प्रमुख, रा.स्व.संघ) ने इस अवसर पर कहाँ कि ग्राम विकास की बात आते ही मोहद मे हुए ग्राम विकास के प्रयत्न ध्यान मे आते है. विश्व मंगल गो ग्राम यात्रा के बाद ग्राम विकास और गोपालन को संबल मिला है. आदिलाबाद मे श्री रविन्द्रगुरूजी ने अपनी पुरानी ग्रामीण संरचना संबंधी प्रशिक्षण के लिए गुरुकुल की स्थापना की है, जिसमे ग्रामीण कारीगिरी की विस्तृत जानकारी मिल सकती है. गाँव मे सामूहिक चिंतन प्रक्रिया से विकास के काम होने चाहिए. अपने कार्य को बल संघ शाखा से मिलता है अतः संघ काम भी ग्रामीण क्षेत्र मे प्रभावशाली बने.

कार्यक्रम मे पू. सवितानंद जी महाराज (मांडवी, सूरत) ने आशीर्वचन देते हुए कहाँ कि हम अपनी संस्कृति से दूर होते गए इसीलिए समस्याग्रस्त बन गए. हमारे गाँव ही हमारी संस्कृति के आधार स्तम्भ थे. आज की चुनावी प्रक्रिया और न्याय प्रक्रिया की कुछ कमियों के कारण गाँव टूटे है. पहले अपने गांवों मे पंचायत प्रणाली के कारण गाँव सुखी, संगठित और संस्कारी थे. गाँव के प्रश्नों का निराकरण गाँव मे ही हो जाता था. कृषि को अंग्रेजी मे Agriculture कहाँ जाता है जिसका तात्पर्य है कृषि संस्कृति संमत होनी चाहिए.

इस संमेलन मे सप्त संपदाओ का प्रदर्शन एवं निदर्शन प्रभावी रूप से किया गया. अनुभवी कार्यकर्ताओ द्वारा अनुभव कथन भी किया गया.

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